Toilets in Lohardaga: लोहरदगा में छात्राओं के लिए बने 39 शौचालय बेकार, कई स्कूलों में लड़कों का टॉयलेट करना पड़ता है उपयोग

लोहरदगा जिले में सरकारी स्कूलों में स्वच्छता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 50
लोहरदगा जिले में सरकारी स्कूलों में स्वच्छता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। जिले के 503 सरकारी विद्यालयों में कुल 1616 शौचालयों में से 66 अनुपयोगी पाए गए हैं। इनमें से बालिकाओं के लिए बनाए गए 934 शौचालयों में से 39 शौचालय उपयोग के लायक नहीं हैं। इसके अलावा, बालकों के 22 शौचालय भी जर्जर स्थिति में हैं। इस प्रकार की स्थिति विद्यालयों में स्वच्छता और छात्राओं की गरिमा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। कई विद्यालयों में शौचालयों की नियमित सफाई नहीं होती है, जबकि कुछ स्थानों पर पानी की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। दरवाजे टूटे हुए हैं और कई जगह सीटें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे गंदगी का अंबार लगा हुआ है। मजबूरी में छात्र-छात्राओं को इन शौचालयों का उपयोग करना पड़ता है, जिससे संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
कई स्कूलों में स्थिति इतनी खराब है कि छात्रों के दो शौचालयों में से एक को मजबूरी में छात्राओं के लिए सुरक्षित करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल अस्वस्थ है, बल्कि छात्राओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। विशेष रूप से किशोरावस्था की छात्राओं के लिए अलग और स्वच्छ शौचालयों की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। मासिक धर्म के दौरान छात्राओं को विद्यालय आने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है, जो कि उनकी शिक्षा को प्रभावित करता है। इस मुद्दे पर न्यायपालिका भी समय-समय पर गंभीर टिप्पणियां कर चुकी है, जिसमें बच्चों के गरिमापूर्ण शिक्षा के अधिकार के तहत विद्यालयों में कार्यशील और अलग शौचालय उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।









