Tragic Deaths in Jharkhand: पहाड़डीहा गांव में 2 मासूमों की जान गई

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड के पहाड़डीहा गांव में हाल ही में दो मासूम बच्चियों की मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। 12 वर्षीय लत
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के आनंदपुर प्रखंड के पहाड़डीहा गांव में हाल ही में दो मासूम बच्चियों की मृत्यु ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। 12 वर्षीय लता किस्कू और 7 वर्षीय दीपिका मुर्मू की मौत बीमारी और अंधविश्वास के कारण हुई। दोनों बच्चियों को समय पर उचित चिकित्सा नहीं मिल पाई, जिसके कारण उनकी जान चली गई। लता की मौत सोमवार तड़के 4 बजे हुई, जबकि दीपिका की मौत बीती रात हुई। उनके परिवार ने अस्पताल जाने के बजाय घरेलू नुस्खों और झाड़फूंक के सहारे इलाज करने का निर्णय लिया, जिससे यह दुखद घटना घटी। इस मामले ने स्वास्थ्य प्रशासन को भी चिंतित कर दिया है।
जैसे ही पहाड़डीहा गांव में बच्चियों की मौत की खबर फैली, स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। मंगलवार को मनोहरपुर और गोइलकेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक संयुक्त टीम ने गांव में पहुंचकर एक विशेष स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया। स्वास्थ्य कर्मियों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों की जांच की और रक्त के नमूने लिए। जांच के दौरान कई लोग बीमार पाए गए, जिनमें से कुछ मलेरिया पॉजिटिव भी थे। इसके बाद, एंबुलेंस के माध्यम से 7 गंभीर मरीजों को मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि गांव में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और अंधविश्वास के कारण लोग गंभीर बीमारियों का सामना कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 5-6 दिनों से कई अन्य लोग भी बीमार पड़े हुए हैं, लेकिन वे अब भी झाड़फूंक का सहारा ले रहे हैं। डॉ. जयश्री किरण, जो गोइलकेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी हैं, ने बताया कि पहाड़डीहा में जान गंवाने वाली दोनों बच्चियां पीलिया से पीड़ित थीं। एक बच्ची का इलाज गांव के लोकल डॉक्टर से किया जा रहा था, जबकि दूसरी का परिजन झाड़-फूंक करा रहे थे। सही समय पर उपचार न मिलने के कारण यह दुखद घटना हुई। डॉ. अनिल कुमार, मनोहरपुर सीएचसी के प्रभारी, ने बताया कि मनोहरपुर सीएचसी में इलाज के लिए आए 9 लोगों में से 7 मरीजों में मलेरिया के लक्षण पाए गए हैं। सभी का रक्त परीक्षण किया जा रहा है और सभी मरीजों का इलाज जारी है। यह घटना एक बार फिर से यह दर्शाती है कि समय पर चिकित्सा सेवाओं का उपयोग कितना महत्वपूर्ण है।









