Transfers Under Scrutiny: जांच के दायरे वाले अधिकारियों को मिली संवेदनशील तैनाती

उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में हाल ही में हुए 376 सहायक आयुक्तों के स्थानांतरण ने विभाग के भीतर असंतोष को जन्म दिया है। पिछले सप्ताह शासन द्वारा किए गए इन स
उत्तर प्रदेश के राज्य कर विभाग में हाल ही में हुए 376 सहायक आयुक्तों के स्थानांतरण ने विभाग के भीतर असंतोष को जन्म दिया है। पिछले सप्ताह शासन द्वारा किए गए इन स्थानांतरणों के बाद से कई अधिकारियों की तैनाती पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप यह है कि स्थानांतरण नीति का पालन नहीं किया गया और कई अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर तैनात किया गया, जिनमें वे अधिकारी भी शामिल हैं जो विभागीय और सतर्कता जांच के दायरे में हैं। यह स्थिति विभाग के भीतर असंतोष और चिंता का कारण बन गई है, क्योंकि यह माना जा रहा है कि ऐसे अधिकारियों को संवेदनशील जिम्मेदारियों पर तैनात करना उचित नहीं है।
इसके अलावा, उन अधिकारियों की तैनाती पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं जिनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति या सतर्कता जांच जैसे मामले लंबित हैं। इस संदर्भ में, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक जिले में सचल दल में तैनात कुछ अधिकारियों को जांच के दायरे में लाने के बाद भी उन्हें फिर से संवेदनशील जिम्मेदारियों पर तैनात किया गया है। यह स्थिति न केवल विभाग के भीतर असंतोष को बढ़ा रही है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्थानांतरण नीति का पालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या इस प्रकार की तैनाती से विभाग की कार्यप्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इसी बीच, मुख्यालय में तैनात एक अपर आयुक्त की तैनाती भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका तबादला फरवरी में गोरखपुर किया गया था, लेकिन लगभग छह महीने बाद भी उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार, अब उनके तबादले को रद्द या संशोधित कराने की कोशिशें भी चल रही हैं। यह स्थिति विभाग के भीतर असंतोष को और बढ़ा रही है और यह दर्शाती है कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। इस मामले में आगे की कार्रवाई और विभागीय जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है।









