UP: अब भूमिका से नहीं, नतीजों से होगी स्कूलों की पहचान

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब परिषदीय विद्यालयों और शिक्षा योजनाओं का मूल्यांकन केवल बैठकों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके लिए तय
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब परिषदीय विद्यालयों और शिक्षा योजनाओं का मूल्यांकन केवल बैठकों और रिपोर्टों के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि इसके लिए तय किए गए परफार्मेंस इंडिकेटर्स (केपीआइ) का उपयोग किया जाएगा। समग्र शिक्षा के तहत सितंबर तक के लिए परिणाम आधारित कार्य प्रणाली को लागू कर दिया गया है। इस नई प्रणाली के तहत निपुण भारत मिशन, विद्यालय निर्माण, बाल वाटिका, समेकित शिक्षा, आरटीई, पीएम श्री समेत सभी प्रमुख योजनाओं की प्रगति की निगरानी की जाएगी। यह निगरानी जिला, ब्लाक और विद्यालय स्तर पर पोर्टल आधारित होगी, जिसमें गैप एनालिसिस और समयबद्ध सुधारात्मक कार्रवाई शामिल होगी। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता को बढ़ाना और सभी योजनाओं के कार्यान्वयन में पारदर्शिता लाना है।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे हर गतिविधि का समयबद्ध डाटा पोर्टलों पर अपडेट करें और मासिक प्रदर्शन की समीक्षा करें। यदि लक्ष्यों को पूरा नहीं किया जाता है, तो तत्काल सुधार योजना लागू की जाएगी। केपीआइ में निपुण भारत मिशन के तहत फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी (एफएलएन), कैच-अप कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण, अधिगम आकलन, कक्षा शिक्षण, शैक्षणिक अनुश्रवण तथा प्रेरणा, दीक्षा, एनबीएमसी और यू-डाइस पर डाटा अपडेट शामिल हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी गतिविधियों का सही तरीके से मूल्यांकन किया जाए और आवश्यकतानुसार सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।
इसके अलावा, विद्यालय निर्माण, आपरेशन कायाकल्प, जर्जर भवन, आधारभूत सुविधाएं, फर्नीचर, बाल वाटिका में नामांकन, स्कूल रेडीनेस और गतिविधि आधारित शिक्षण की भी नियमित निगरानी की जाएगी। आरटीइ, शारदा, स्कूल से बाहर बच्चों का नामांकन, पीएम श्री, समेकित शिक्षा, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सेवाएं, मैनेजमेंट इनफार्मेंशन सिस्टम (एमआइएस), वित्तीय प्रगति, लंबित मामलों के निस्तारण और निरीक्षण को भी केपीआइ से जोड़ा गया है। इस प्रकार, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल विद्यालयों की गुणवत्ता को बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल भी सुनिश्चित करेगा।









