Uttarakhand: मंदिर व प्राथमिक विद्यालय में चल रहे बालिका इंटर कॉलेज, ऐसी है शिक्षा में दावों की जमीनी हकीकत

उत्तराखंड में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कई राजकीय बालिका इंटर कॉलेज आज भी मंदिरों और प्राथमिक विद्यालय
उत्तराखंड में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के सरकारी दावों के बीच एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। कई राजकीय बालिका इंटर कॉलेज आज भी मंदिरों और प्राथमिक विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। राजधानी देहरादून से लेकर हरिद्वार तक की स्थिति यह दर्शाती है कि छात्राओं को पर्याप्त कक्षाओं और बुनियादी सुविधाओं के बिना पढ़ाई करनी पड़ रही है। बरसात के मौसम में उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं, क्योंकि इन अस्थायी स्थानों पर न तो खेल के मैदान हैं और न ही छात्राओं और शिक्षिकाओं के बैठने के लिए उचित व्यवस्था। इस स्थिति में, शिक्षा विभाग के दावों की वास्तविकता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
देहरादून के रायपुर में स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में 110 छात्राएं अध्ययन कर रही हैं। यह स्कूल श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर के सभागार में संचालित किया जा रहा है, जहां न तो खेल का मैदान है और न ही छात्राओं के लिए बैठने की उचित व्यवस्था। कक्षा छह से 12वीं तक की कक्षाएं सत्संग के लिए बने दो सभागारों में चल रही हैं, जो कि शिक्षा के लिए एक उपयुक्त वातावरण नहीं है। मंदिर के पुजारी सुधीर सेमवाल ने बताया कि इस परिसर में बालिकाओं की कक्षाएं चल रही हैं, लेकिन यह स्थिति शिक्षा के मानकों के अनुरूप नहीं है। इसी प्रकार, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गुलाबशाहपीर रुड़की को राजकीय प्राथमिक विद्यालय रामपुर में संचालित किया जा रहा है।
राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टांडा बन्हेड़ा हरिद्वार और राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मानकपुर आदमपुर भी प्राथमिक विद्यालयों में संचालित हो रहे हैं। यह स्थिति राज्य गठन के 25 साल बाद भी बनी हुई है, जबकि शिक्षा विभाग का वार्षिक बजट 12 हजार करोड़ से अधिक है। सरकार की ओर से बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन स्कूलों के लिए पर्याप्त भवन और मूलभूत सुविधाओं की कमी इन प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करती है। अभिभावकों का कहना है कि बालिकाओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त विद्यालय भवन भी उपलब्ध कराना आवश्यक है।











