Government's Mega Plan for Man-Eating and Sick Leopards in Uttarakhand: उत्तराखंड में आदमखोर और बीमार गुलदारों के लिए सरकार का मेगा प्लान, 10 जिलों में बनेंगे रिहैबिलिटेशन सेंटर

केदार दत्त, देहरादून। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और रेस्क्यू के दौरान घायल एवं बीमार गुलदारों के उपचार की चुनौती से निपटने के लिए वन विभा
केदार दत्त, देहरादून। उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं और रेस्क्यू के दौरान घायल एवं बीमार गुलदारों के उपचार की चुनौती से निपटने के लिए वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण योजना तैयार की है। इस योजना के तहत राज्य के 10 जिलों में रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों का उद्देश्य न केवल गुलदारों का उपचार करना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखना और उनकी निगरानी करना भी है। इसके लिए 16 करोड़ रुपये का बजट भी प्रस्तावित किया गया है, जो कि क्षतिपूरक वनीकरण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण (कैंपा) से प्राप्त होगा। अब केवल केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी का इंतजार है।
राज्य में वन्यजीवों के हमलों की घटनाओं पर नजर डालें तो गुलदार सबसे अधिक समस्या बनकर उभरे हैं। अक्सर बीमार, घायल या शिकार करने में असमर्थ गुलदार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं, जिससे मानवों पर हमले की संभावना बढ़ जाती है। इन गुलदारों को पकड़ने के बाद उनके उपचार और सुरक्षित रखरखाव की चुनौती वन विभाग के सामने खड़ी होती है। वर्तमान में हरिद्वार, ढेला, रानीबाग और अल्मोड़ा में ही रेस्क्यू सेंटर हैं, जिससे केवल कुछ जिलों को ही कवर किया जा रहा है। अन्य जिलों से पकड़े गए गुलदारों को इन सेंटरों तक लाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
विभाग ने इस समस्या को देखते हुए सभी 10 जिलों में एक-एक रीजनल लेपर्ड ट्रांजिट ट्रीटमेंट एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है। अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव विवेक पांडेय ने बताया कि रुद्रप्रयाग, चमोली और अन्य जिलों में इन सेंटरों के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि इन सेंटरों की स्थापना के लिए केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को प्रस्ताव भेजा गया है, और उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। इन सेंटरों में घायल, बीमार या रेस्क्यू किए गए गुलदारों का प्राथमिक उपचार, स्वास्थ्य परीक्षण, निगरानी और पुनर्वास किया जाएगा।









