Victim of Pellet Gun in Kashmir: पैलेट गन से आंखों की रोशनी गई, पूरी तरह लगे बैन

साल 2016 की गर्मियों ने कश्मीर के शोपियां जिले में एक ऐसी घटना को जन्म दिया, जिसने 14 साल की इंशा मुश्ताक की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। उस दिन, जब पूरे कश
साल 2016 की गर्मियों ने कश्मीर के शोपियां जिले में एक ऐसी घटना को जन्म दिया, जिसने 14 साल की इंशा मुश्ताक की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। उस दिन, जब पूरे कश्मीर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, इंशा अपने घर के अंदर थीं। जब उन्होंने खिड़की बंद करने की कोशिश की, तभी सुरक्षाबलों द्वारा चलाई गई पैलेट गन के छर्रे उनके चेहरे और आंखों में लग गए। इस हादसे के कारण उनकी दोनों आंखों की रोशनी चली गई। इंशा ने इस दर्दनाक अनुभव को साझा करते हुए कहा कि पैलेट गन का इस्तेमाल किसी भी आम हथियार जितना ही जानलेवा है और इसे पूरी तरह से बैन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के अन्य हिस्सों में लोग जो दर्द महसूस कर रहे हैं, वैसा ही खौफनाक मंजर कश्मीर में पहले ही देखा जा चुका है।
पैलेट गन का इस्तेमाल कश्मीर में 2010 से शुरू हुआ था, जब उमर अब्दुल्ला की सरकार ने इसे भीड़ नियंत्रण के लिए एक विकल्प के रूप में पेश किया। 2016 में जब इंशा पर यह हमला हुआ, तब राज्य में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की गठबंधन सरकार थी। इस दौरान कश्मीर के कई हिस्सों में पैलेट गन का अत्यधिक इस्तेमाल हुआ, जिसके परिणामस्वरूप 2010 से 2019 के बीच लगभग 6,000 लोग गंभीर रूप से घायल हुए और कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई। इस हथियार के कारण सैकड़ों युवाओं और बच्चों की आंखों की रोशनी चली गई, जिससे उनकी जिंदगी हमेशा के लिए प्रभावित हुई।
इस मुद्दे पर मानवाधिकार संगठनों की आवाजें भी उठ रही हैं, जो मानते हैं कि पैलेट गन जैसे हथियारों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि पैलेट गन को 'गैर-जानलेवा' कहना वास्तविकता से परे है। एक पैलेट गन के कारतूस से सैकड़ों छोटे और नुकीले छर्रे निकलते हैं, जो हवा में फैल जाते हैं। इसके सुरक्षित उपयोग के लिए कई नियमों का पालन करना आवश्यक है, लेकिन जब सामने हिंसक भीड़ हो, तो सटीक निशाना लगाना लगभग असंभव हो जाता है। इंशा मुश्ताक जैसी पीड़ितों की मांग अब इस वैश्विक मुहिम का हिस्सा बन चुकी है, जो यह मानती है कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किसी भी हालत में नहीं किया जाना चाहिए।









