Vishwakarma Shram Samman Yojana: यूपी के कारीगरों को स्वरोजगार की सौगात, 10 दिन की ट्रेनिंग और 4500 मानदेय

गाजियाबाद से मिली जानकारी के अनुसार, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (vishwakarma shram samman yojana) का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार स
गाजियाबाद से मिली जानकारी के अनुसार, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (Vishwakarma Shram Samman Yojana) का उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक तकनीक और स्वरोजगार से जोड़ना है। इस योजना के तहत वर्ष 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक कारीगर इस योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं, जिससे उन्हें प्रशिक्षण, आधुनिक टूलकिट और आर्थिक सहायता प्राप्त होगी। जिला उद्योग केंद्र के अनुसार, इस वर्ष दर्जी, नाई, लोहार, बढ़ई, कुम्हार और हलवाई जैसे विभिन्न पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगर आवेदन कर सकते हैं। यह योजना पारंपरिक हुनर को आधुनिक बाजार से जोड़कर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करती है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में जिले को 1,050 लाभार्थियों का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। चयनित सभी लाभार्थियों को 10 दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन 450 रुपये की दर से कुल 4,500 रुपये का मानदेय उनके बैंक खातों में भेजा गया है। इसके अलावा, आधुनिक टूलकिट का वितरण भी प्रक्रिया में है। पिछले वर्ष पर्याप्त आवेदन नहीं मिलने के कारण मोची, सुनार और टोकरी बुनकर श्रेणी को जिले की योजना से हटा दिया गया है। उपायुक्त उद्योग आशुतोष सिंह ने बताया कि पात्र कारीगरों को diupmsme.upsdc.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि उन्हें प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
इस योजना के तहत चयनित कारीगरों को आवासीय प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें उन्हें आधुनिक तकनीक, नए उपकरणों का उपयोग, व्यवसाय प्रबंधन और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने के तरीके सिखाए जाते हैं। प्रशिक्षण के दौरान रहने और खाने का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाया जाता है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद लाभार्थियों को 10,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे वे अपने काम के लिए आधुनिक टूल्स और मशीनें खरीद सकें। इस प्रकार, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना पारंपरिक कारीगरों के लिए स्वरोजगार के नए द्वार खोलने का महत्वपूर्ण प्रयास है।











