Waste Management Innovation: रोहतक के कचड़े से बन रही बिजली

रोहतक शहर का कचड़ा अब केवल डंपिंग साइट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे बिजली उत्पादन भी किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से संचालित सालिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्ला
रोहतक शहर का कचड़ा अब केवल डंपिंग साइट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इससे बिजली उत्पादन भी किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से संचालित सालिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट पर शहर से आने वाले कूड़े का 100 प्रतिशत सेग्रीगेशन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत तैयार होने वाले रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल (आरडीएफ) को सोनीपत के मुथरल और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के पावर प्लांटों में भेजा जा रहा है, जहां इसका उपयोग बिजली उत्पादन में ईंधन के रूप में किया जाता है। नगर निगम के सुनारिया स्थित सालिड वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट पर रोजाना शहर का डोर टू डोर कलेक्ट किया हुआ 230 से 280 टन कचरा पहुंचता है। यहां सबसे पहले कूड़े को कन्वेयर बेल्ट पर डालकर उसकी छंटाई की जाती है। मशीनों और कर्मचारियों की मदद से गीला और सूखा कचरा अलग किया जाता है। इसके बाद प्लास्टिक, कपड़ा, चमड़ा, रबर, थर्मोकोल, पैकेजिंग सामग्री और अन्य ज्वलनशील पदार्थों को अलग कर लिया जाता है, जबकि धातु, कांच और अन्य रिसाइकिल होने वाली सामग्री को अलग से भेज दिया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद ज्वलनशील कचरे को कटर मशीन में डालकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है। अगर इनमें नमी ज्यादा होती है तो उसे सूखाया जाता है, ताकि ईंधन की गुणवत्ता बेहतर रहे। इसके बाद इस सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल तैयार किया जाता है।
अधिकारियों की मानें, तो रोहतक प्लांट से रोजाना करीब 100 टन आरडीएफ तैयार होकर ट्रकों के माध्यम से सोनीपत के मुरथल और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के पावर प्लाटों में भेजा जाता है। अधिकारियों का कहना है कि सुबह से ही प्लांट पर कूड़ा आना शुरू हो जाता है, जिसके बाद इसके सेग्रीगेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि प्लांट में पहुंचने वाले जैविक यानी गीले कचरे का उपयोग खाद बनाने के लिए किया जाता है। इस प्रक्रिया में पहले चरण में कूड़े को कन्वेयर बेल्ट पर डालकर उसकी प्राथमिक छंटाई की जाती है। इस दौरान बड़े आकार के प्लास्टिक, कपड़े, लकड़ी, धातु और अन्य सामग्री को अलग किया जाता है। दूसरे चरण में मशीनों और कर्मचारियों की मदद से कूड़े को गीले, सूखे और रिसाइकिल होने वाले हिस्सों में बांटा जाता है। चुंबकीय मशीनों से लोहे जैसी धातुओं को अलग किया जाता है, जबकि प्लास्टिक, कागज, रबर, चमड़ा और कपड़े जैसी ज्वलनशील सामग्री को आरडीएफ बनाने के लिए अलग कर लिया जाता है। वहीं कांच, धातु और अन्य पुनर्चक्रण योग्य सामग्री को रिसाइक्लिंग इकाइयों में भेज दिया जाता है।









