Weekend Ride with RapidO: गिग वर्कर्स की असली मुश्किलें सामने आईं

बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाल ही में अपने अनुभव साझा किए हैं, जब उन्होंने वीकेंड पर रैपिडो ड्राइविंग शुरू की। उनका यह कदम भारी क्रेडिट कार्ड बिल चुका
बेंगलुरु के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने हाल ही में अपने अनुभव साझा किए हैं, जब उन्होंने वीकेंड पर रैपिडो ड्राइविंग शुरू की। उनका यह कदम भारी क्रेडिट कार्ड बिल चुकाने के लिए था। उन्होंने बताया कि इस अनुभव ने उन्हें भारत में गिग वर्कर्स द्वारा सामना की जाने वाली परेशानियों का सामना करने का मौका दिया। इंजीनियर ने अपनी कहानी में बताया कि कैसे उन्होंने अतिरिक्त कमाई करने के इरादे से राइड-हेलिंग कैप्टन के रूप में रजिस्ट्रेशन किया। प्रारंभ में, यह अनुभव सकारात्मक रहा और उन्होंने अच्छी कमाई की। लेकिन एक राइड ने उनकी धारणा को पूरी तरह बदल दिया। एक वीकेंड पर जब वह एक यात्री को लेने पहुंचे, तो यात्री के साथी ने उनसे राइड कैंसिल करने को कहा। जब इंजीनियर ने बताया कि कैंसिल करने पर कैप्टन पर जुर्माना लगता है, तो विवाद बढ़ गया। उस व्यक्ति ने हेलमेट पर इतनी जोर से हमला किया कि उसका शीशा टूट गया। इस घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि गिग वर्कर्स को कितनी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इंजीनियर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने यह काम खुद चुना है, लेकिन अगर उन्हें यह पसंद नहीं आया, तो वे अगले हफ्ते से राइड लेना बंद कर सकते हैं। उनके लिए यह केवल एक अतिरिक्त आय का स्रोत है, लेकिन उन गिग वर्कर्स का क्या, जिनका पूरा घर इसी काम पर निर्भर है? उन्होंने कहा कि हर राइड के पीछे ऐसे कर्मचारी होते हैं, जिन्हें खराब व्यवहार, नशे में यात्रियों, राइड कैंसिल होने, गाड़ी खराब होने और सुरक्षा जैसी कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, वे अपनी और परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए काम करते हैं। इंजीनियर ने यह भी बताया कि विवाद होने पर राइड-हेलिंग कैप्टन को ग्राहकों की तुलना में कम मदद मिलती है, जिससे उन्हें मानसिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।









