Women Farmers on the Rise: बिहार में महिला किसानों की संख्या 89 लाख के पार; एक साल में सवा चार लाख बढ़ीं

रमण शुक्ला, पटना। बिहार में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि हो रही है। पारंपरिक रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में अब महिलाएं
रमण शुक्ला, पटना। बिहार में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि हो रही है। पारंपरिक रूप से पुरुषों के वर्चस्व वाले इस क्षेत्र में अब महिलाएं न केवल श्रमशक्ति के रूप में, बल्कि निर्णय लेने वाली किसान और उद्यमी के रूप में भी अपनी पहचान बना रही हैं। राज्य में पंजीकृत महिला किसानों की संख्या 89 लाख के पार पहुंच गई है, जो कि चालू वित्तीय वर्ष में करीब सवा चार लाख की वृद्धि दर्शाती है। कृषि विभाग, डेयरी और जीविका के विभिन्न कार्यक्रमों ने इस बदलाव को गति दी है। राज्य के कई जिलों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से सब्जी उत्पादन, मशरूम, मधुमक्खी पालन, बागवानी, जैविक खेती, बीज उत्पादन और मूल्य संवर्धन जैसे कार्यों में संलग्न हो रही हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। पहले जहां महिलाएं मुख्य रूप से खेतों में मजदूर के रूप में काम करती थीं, वहीं अब वे फसल चयन, उन्नत बीज, सिंचाई और विपणन जैसे महत्वपूर्ण निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
महिलाओं को भूमि रजिस्ट्री में सरकार द्वारा दी जा रही कर छूट भी महिला किसानों की बढ़ती संख्या का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। कृषि क्षेत्र में भूमि स्वामित्व बढ़ने से उनकी पहचान किसान के रूप में और मजबूत हुई है, जिससे वे सरकारी कृषि योजनाओं और विभिन्न सुविधाओं का लाभ भी उठा पा रही हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि रोजगार के लिए पुरुषों के दूसरे राज्यों में पलायन करने के कारण खेती की जिम्मेदारी महिलाओं पर अधिक आ गई है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से महिला किसानों को प्रशिक्षण, आधुनिक कृषि तकनीक, ड्रोन आधारित खेती की जानकारी, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जुड़ाव और विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। इससे महिलाओं का कृषि क्षेत्र में आत्मविश्वास बढ़ा है।









