World Hepatitis Day: दिल्ली में तेजी से बढ़ रहा हेपेटाइटिस का खतरा, चार लाख से ज्यादा पीड़ित

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में वायरल हेपेटाइटिस एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1.7 लाख लोग हेप
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में वायरल हेपेटाइटिस एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। हाल के वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, दिल्ली में लगभग 1.7 लाख लोग हेपेटाइटिस-बी और करीब ढाई लाख लोग हेपेटाइटिस-सी संक्रमण से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई के मामलों में वृद्धि होने की आशंका है। दूषित पेयजल, खराब स्वच्छता और संक्रमित भोजन इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। एम्स, सफदरजंग अस्पताल, जीबी पंत अस्पताल, लोकनायक अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस-बी और सी के मरीज नियमित रूप से जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मानसून के दौरान पीलिया और हेपेटाइटिस-ए व ई के मामलों में भी बढ़ोतरी देखी जाती है, जिससे विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से लीवर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों में खतरा अधिक होता है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम (एनवीएचसीपी) के अनुसार, देश में हर वर्ष वायरल हेपेटाइटिस के कारण लगभग 2.72 लाख लोगों की मौत होती है। इनमें से अधिकांश मौतें लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर जैसी जटिलताओं के कारण होती हैं। मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आकलन का हवाला देते हुए बताया है कि देश में लगभग चार करोड़ लोग दीर्घकालिक हेपेटाइटिस-बी और 1.2 करोड़ लोग हेपेटाइटिस-सी से संक्रमित हैं। डब्ल्यूएचओ की ग्लोबल हेपेटाइटिस रिपोर्ट-2026 के अनुसार, भारत हेपेटाइटिस-बी से होने वाली मौतों के मामले में दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित देशों में शामिल है। इसके अलावा, हेपेटाइटिस-सी से होने वाली मौतों के मामले में भी भारत शीर्ष 10 देशों में है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2024 में दुनिया भर में वायरल हेपेटाइटिस के कारण लगभग 13 लाख लोगों की मौत हुई, जिनमें से अधिकांश लीवर सिरोसिस और लीवर कैंसर के कारण हुईं।









