World Nature Conservation Day: सूखे कुएं, बंजर खेत और पलायन थी पहचान, जल संचय ने बदल दी कहानी

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जल संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों ने गांवों की तस्वीर बदल दी है। पहले जहां सूखे कुएं और बंजर खेतों के कारण पलायन की समस्या थी, व
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में जल संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों ने गांवों की तस्वीर बदल दी है। पहले जहां सूखे कुएं और बंजर खेतों के कारण पलायन की समस्या थी, वहीं अब जल संचय के प्रयासों से स्थिति में सुधार हुआ है। यहां के ग्रामीणों ने मिलकर जल संरचनाओं का निर्माण किया है, जिससे न केवल भूजल स्तर में वृद्धि हुई है, बल्कि कृषि उत्पादन में भी सुधार आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इन प्रयासों की सराहना की है। जल संचय के तहत डेढ़ हजार से अधिक तालाब बनाए गए हैं, जो इस क्षेत्र की जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद कर रहे हैं। इन तालाबों के निर्माण से गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ी है और इससे पलायन की दर में भी कमी आई है।
सीधी जिले के कुसमी विकासखंड में लुरघुटी वाटरशेड परियोजना के तहत कई जल संरचनाएं बनाई गई हैं। ग्राम सुधार समिति के सीईओ सार्थक त्यागी के अनुसार, पहाड़ियों से लेकर घाटियों तक स्टैगर्ड कंटूर ट्रेंच, खेत तालाब, चेकडैम और मोघा बांध का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर का उपयोग किया गया है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, जिन नालों में पहले बारिश के बाद पानी खत्म हो जाता था, अब उनमें बारहमासी जलधारा बहने लगी है। इससे किसानों को फसल उत्पादन में भी मदद मिली है।
इस वर्ष कम वर्षा के बावजूद, किसानों ने जल संरक्षण के माध्यम से अपनी फसलें बचाई हैं। उदाहरण के लिए, बैजनाथ कुशवाहा ने अपने तालाब का पानी अन्य किसानों को भी दिया, जिससे उनकी फसल सुरक्षित रही। लुरघुटी के किसान सूर्यप्रताप सिंह ने जल संरक्षण और उन्नत खेती के प्रशिक्षण के आधार पर जैविक पद्धति से धान की खेती की, जिससे अच्छी उपज मिली। जनपद पंचायत कुसमी के सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा ने बताया कि जल संरक्षण के कारण खेती का रकबा बढ़ा है और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। अब किसान सब्जी, बागवानी और मछली पालन को भी अपना रहे हैं।









