Yogi Government's Respect for Sant Ravidas: समरसता का राष्ट्रव्यापी संकल्प

भारतीय समाज की आत्मा में भक्ति और समता का प्रवाह हमेशा से विद्यमान रहा है, और इसके पीछे हमारे महान मनीषियों और संतों का मार्गदर्शन है। संत शिरोमणि गुरु रविदास भ
भारतीय समाज की आत्मा में भक्ति और समता का प्रवाह हमेशा से विद्यमान रहा है, और इसके पीछे हमारे महान मनीषियों और संतों का मार्गदर्शन है। संत शिरोमणि गुरु रविदास भी ऐसे ही संत थे, जिन्होंने अपने विचारों के माध्यम से समाज में समता और एकता का संदेश फैलाया। उन्होंने कहा था कि मन चंगा तो कठौती में गंगा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाहरी आडंबरों से परे, आंतरिक शुद्धता ही धर्म का सार है। संत रविदास ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां न कोई दुख हो, न भेदभाव और न ऊंच-नीच का बंधन। उनकी यह सोच सामाजिक क्रांति का बीज बनी, जिसने सदियों से हाशिये पर रहे समाज को गरिमा और आत्मसम्मान का मार्ग दिखाया। जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को संत रविदास की जन्मस्थली पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करती है, तो यह समरसता की परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण संकल्प है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब संत रविदास की जन्मस्थली पर मत्था टेकेंगे, तो यह दृश्य एक बड़ा प्रतीक बनेगा। प्रदेश का सर्वोच्च प्रशासनिक प्रतिनिधि, समाज के सबसे वंचित वर्गों की आवाज बने संत के चरणों में नतमस्तक होकर यह संदेश देगा कि सत्ता और समाज दोनों के केंद्र में समता और सम्मान का भाव है। इसी दिन 131 कलशों के विधिवत पूजन के साथ संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष का भव्य शुभारंभ होगा। ये कलश उत्तर प्रदेश के 98 स्थानों के साथ-साथ देश के 27 राज्यों और छह जोनों के लिए रवाना किए जाएंगे। यह आयोजन दर्शाता है कि संत रविदास का संदेश पूरे राष्ट्र की साझी विरासत है। जब एक ही कलश-जल की धारा देश के कोने-कोने तक पहुंचेगी, तो यह भौगोलिक सीमाओं से परे सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बनेगा।









