Youth Power as Nation's Strength: युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ऊर्जा और आशा, डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण ही सच्ची शिक्षा : आनंदीबेन पटेल

जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षा समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उच्च शिक्षा के उद्द
जागरण संवाददाता, मल्हनी (जौनपुर)। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षा समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने उच्च शिक्षा के उद्देश्य को केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डिग्री से कुछ नहीं होता, शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य चरित्र निर्माण है। ऐसी शिक्षा ही दया, प्रेम, सहिष्णुता और सेवा की भावना पैदा करती है। युवा अपनी शिक्षा और परिश्रम को व्यक्तिगत उन्नति के बजाय समाज और राष्ट्र की प्रगति का माध्यम बनाएं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा और आशा है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से ही इस शक्ति को सही दिशा दी जा सकती है। आज भारत का युवा अंतरिक्ष, एयरोस्पेस, तकनीक, स्टार्टअप, नवाचार और रक्षा उत्पादन सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रहा है। औसत आयु 28 वर्ष से कम वाले देश का युवा यदि अंतरिक्ष से लेकर सीमाओं तक अपनी प्रतिभा का परचम लहरा सकता है तो उसके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। युवाओं को बड़ा बनने के लिए कुछ बड़ा करने का संकल्प लेना होगा। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में शोध, नवाचार और उद्यमिता की संस्कृति विकसित करें। स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन सेंटर को बढ़ावा देकर युवाओं को रोजगार मांगने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम किया जाए। उन्होंने कहा कि देश में सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में नए अवसर खुल रहे हैं। विश्वविद्यालयों को इन बदलावों के अनुरूप पाठ्यक्रम और शोध की दिशा तय करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन विश्वविद्यालयों के नाम महापुरुषों के नाम पर हैं, वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को उनके जीवन और योगदान की जानकारी होनी चाहिए। विश्वविद्यालय अपने आसपास के सामाजिक और पर्यावरणीय परिवेश से भी विद्यार्थियों को जोड़ें। विद्यार्थियों से यह भी लिखवाया जाए कि उनके क्षेत्र और समाज में क्या मिला और क्या विलुप्त हुआ, ताकि नई पीढ़ी अपनी विरासत और बदलते परिवेश को समझ सके। राज्यपाल ने कहा कि संख्या केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते भारत की तस्वीर है। उन्होंने विश्वविद्यालय में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी और उपलब्धियों की सराहना की। कहा कि बेटियां लगातार आगे बढ़ रही हैं और यह विकसित भारत की पहचान है। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी उपलब्धि केवल परिवार की नहीं, बल्कि समाज और देश की उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसके लिए युवाओं को नशामुक्त, स्वस्थ, संस्कारवान और जिम्मेदार नागरिक बनाना होगा। उन्होंने विश्वविद्यालयों में हॉस्टल, भोजन, पेयजल और विद्यार्थियों की सुविधाओं की नियमित जांच पर भी जोर दिया। कहा कि शिक्षा का वातावरण तभी सार्थक होगा, जब विद्यार्थियों को स्वस्थ और सुरक्षित माहौल मिलेगा। राज्यपाल ने डिजिटल डिग्री और डिजी लॉकर की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की उपाधियों को सुरक्षित रखने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वविद्यालय से डिग्रियों के अपलोड और डाउनलोड का आंकड़ा भी मांगा और कम डाउनलोड होने के कारणों की समीक्षा करने की बात कही। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे घर, गांव, जिला, प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। संतोष, सेवा और प्रेम को जीवन का आधार बनाकर आगे बढ़ें। शिक्षा तभी सार्थक होगी, जब उससे व्यक्ति के साथ समाज और राष्ट्र का भी कल्याण हो। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एडीजी एनसीसी मेजर जनरल गौरव गौतम ने विद्यार्थियों को भावी जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि स्वस्थ शरीर और निरोगी काया से ही जीवन के लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। विद्यार्थियों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटा शारीरिक परिश्रम और व्यायाम के लिए देना चाहिए। उन्होंने सत्य, ईमानदारी और कर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि परिस्थितियां हमेशा अनुकूल नहीं होतीं, लेकिन मन, वचन और कर्म में ईमानदारी रखने वाला व्यक्ति अपने लक्ष्य तक अवश्य पहुंचता है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी शिक्षा का उपयोग व्यक्तिगत उत्थान के साथ समाज के विकास के लिए करने का आह्वान किया। विशिष्ट अतिथि उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि विश्वविद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थी ज्ञान, कौशल और संस्कार के बल पर स्वयं को प्रकाशित करने के साथ समाज को भी दिशा देंगे। सरकार स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से युवाओं को नए अवसर दे रही है। उन्होंने कहा कि बेटियां हर क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर रही हैं और उनका निरंतर आगे बढ़ना विकसित भारत की पहचान है। कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या प्रस्तुत की। कुलसचिव डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कार्यक्रम की रूपरेखा रखी। संचालन जनसंचार विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज मिश्र ने किया। समारोह में प्राचार्य टीडी पीजी कॉलेज जौनपुर राम आसरे सिंह, डॉ. प्रशांत सिंह राष्ट्रीय पीजी कॉलेज जमुहाई और डॉ. धीरेंद्र चौधरी रज्जू भैया शोध संस्थान सहित अन्य लोग मौजूद रहे। प्राथमिक विद्यालय के बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण पर गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद लोकगीत 'हमार देशवा सोनवा का चिरैया' की प्रस्तुति ने समारोह में लोक संस्कृति का रंग भर दिया। विश्वविद्यालयों को महापुरुषों के जीवन से जोड़ें। राज्यपाल ने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों के नाम महापुरुषों के नाम पर हैं। विद्यार्थियों को यह जानना चाहिए कि उनके विश्वविद्यालय का नाम जिस महापुरुष के नाम पर रखा गया है, उनका जीवन और योगदान क्या रहा। उन्होंने विश्वविद्यालयों को स्थानीय इतिहास, संस्कृति और पर्यावरण से विद्यार्थियों को जोड़ने की भी सलाह दी। 52 बेटियों ने हासिल किए स्वर्ण पदक। राज्यपाल ने कहा कि बदलते भारत में बेटियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। विश्वविद्यालय में 52 छात्राओं और 31 छात्रों को स्वर्ण पदक मिलना इस बदलाव का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि बेटियों की उपलब्धियां समाज में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत हैं। डिग्री डिजी लॉकर में, अपलोड-डाउनलोड का हिसाब मांगा। राज्यपाल ने कहा कि सभी डिग्रियों को डिजी लॉकर में सुरक्षित किया गया है। पहले डिग्री में संशोधन के नाम पर विद्यार्थियों से वसूली की शिकायतें आती थीं। अब डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी। उन्होंने विश्वविद्यालय से पूछा कि कितनी डिग्रियां अपलोड हुईं और कितनी डाउनलोड की गईं, इसका पूरा विवरण रखा जाए और कम डाउनलोड के कारणों की भी समीक्षा हो। 25 लाख फर्जी डिग्रियां नष्ट करने का जिक्र। राज्यपाल ने फर्जी डिग्रियों की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में करीब 25 लाख फर्जी डिग्रियों को नष्ट किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रयास से अंकपत्र और डिग्री को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की व्यवस्था हुई है, जिससे फर्जीवाड़े पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। हॉस्टल की व्यवस्था खुद जांचें कुलपति। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के









