Allahabad High Court: संज्ञान अपराध की सूचना पर FIR दर्ज करना अनिवार्य

प्रयागराज से विधि संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें कहा गया है कि संज्ञान अपराध की सूचना मि
प्रयागराज से विधि संवाददाता की रिपोर्ट के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है जिसमें कहा गया है कि संज्ञान अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना पुलिस का अनिवार्य कर्तव्य है। न्यायमूर्ति जयप्रकाश तिवारी की एकलपीठ ने इस मामले में विशेष अदालत (एससी/एसटी एक्ट) के उस आदेश को रद कर दिया, जिसमें अनुसूचित जाति से जुड़े आइसा छात्र नेता विवेक कुमार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग को संदिग्ध बताकर खारिज कर दिया गया था। यह निर्णय एक ऐसे समय में आया है जब पुलिस की कार्यप्रणाली और उनके कर्तव्यों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विवेक कुमार ने आरोप लगाया कि 17 अक्टूबर 2023 को विश्वविद्यालय के लाइब्रेरी गेट के बाहर छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के चीफ प्राक्टर राकेश सिंह ने जातिसूचक गालियों का प्रयोग किया और उन पर लाठी से हमला किया। इस घटना के दौरान मौके पर मौजूद सब-इंस्पेक्टर ने भी यह सब देखा था और इस घटना का सीसीटीवी व मोबाइल फुटेज भी मौजूद है।
विवेक कुमार ने बताया कि पुलिस द्वारा मेडिकल जांच नहीं कराए जाने के बाद उन्होंने खुद तेज बहादुर सप्रू अस्पताल जाकर इलाज कराया और इसकी फोटो भी अखबारों में प्रकाशित हुई। घटना के दिन ही उन्होंने कर्नलगंज थाने में लिखित शिकायत दी थी। इसके बाद, उन्होंने सेवानिवृत्त आइपीएस अधिकारी के साथ मिलकर एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज कराने के लिए दोबारा शिकायत दी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने पुलिस आयुक्त सहित उच्च अधिकारियों को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी, फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई। विवेक कुमार ने सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, प्रयागराज की अदालत में आवेदन दिया, जिसे 18 फरवरी 2024 के आदेश से खारिज कर दिया गया।
















