BJP's Traditional Vote Bank Shifts: बांकीपुर रिजल्ट विश्लेषण में 5 प्रमुख कारण जो NDA की स्थिति को कमजोर करते हैं

बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम ने बीजेपी के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ममता बनर्जी से पश्चिम बंगाल छीनने और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में विभाजन के बाद बीजेपी
बांकीपुर उपचुनाव के परिणाम ने बीजेपी के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ममता बनर्जी से पश्चिम बंगाल छीनने और उद्धव ठाकरे की शिवसेना यूबीटी में विभाजन के बाद बीजेपी ने दिल्ली के जंतर मंतर पर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के चलते अपने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया। यह समय तब आया जब एनडीए गठबंधन संसद में दो तिहाई बहुमत पारित करने के बेहद करीब था। आमतौर पर उपचुनाव सत्ताधारी पार्टी के लिए आसान होते हैं, लेकिन इस बार स्थिति भिन्न रही। पिछले नवंबर में, एनडीए ने 243 सदस्यीय विधानसभा में 202 सीटें जीती थीं। बांकीपुर सीट बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का गढ़ मानी जाती है, जिन्होंने 2006 से लगातार पांच बार यह सीट जीती है। नितिन नवीन के दिवंगत पिता नबीन किशोर सिन्हा ने 1995 से 2006 तक इस सीट पर कब्जा किया था। उपचुनाव नितिन नवीन द्वारा खाली की गई सीट पर हुआ, जिसे उन्होंने विधानसभा चुनाव में लगभग 52,000 वोटों से जीता था।
बीजेपी के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पहली बार चुनावी मुकाबले का सामना किया, जहां उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर थे। सम्राट चौधरी के कुशवाहा नेता होने के नाते यह उम्मीद की जा रही थी कि वे अपने दिवंगत पिता, समाजवादी नेता शकुनी चौधरी द्वारा स्थापित लव-कुश गठबंधन को मजबूत करेंगे। लेकिन बांकीपुर विधानसभा सीट पर मिली हार ने बीजेपी को बड़ा झटका दिया। इस हार के पीछे असंतोष और आरजेडी की अस्वीकृति का बड़ा हाथ रहा। जनता ने प्रशांत किशोर को जनादेश दिया, हालांकि उनकी पार्टी 2025 के विधानसभा चुनाव में 238 सीटों पर लड़ने के बावजूद कोई सीट हासिल नहीं कर पाई।
















