Court ruling in Panchkula: पंचकूला में निजी जमीन पर बना दिया सरकारी स्कूल, अब मिलेगा मुआवजा या बराबर का प्लाॅट

पंचकूला में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां सरकारी स्कूल के निर्माण के लिए निजी जमीन का उपयोग किया गया। यह घटना 23 साल पहले की है, जब बिना किसी भूमि अधिग्रहण
पंचकूला में एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां सरकारी स्कूल के निर्माण के लिए निजी जमीन का उपयोग किया गया। यह घटना 23 साल पहले की है, जब बिना किसी भूमि अधिग्रहण या मुआवजे के सरकारी प्राइमरी स्कूल का निर्माण कर दिया गया। अब, इस मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद, पंचकूला जिला अदालत ने फैसला सुनाया है कि हरियाणा सरकार और नगर निगम को छह महीने के भीतर भूमि का विधिसम्मत अधिग्रहण करना होगा और उचित मुआवजा देना होगा या भूमि मालिकों को बराबर का प्लॉट देना होगा। इस मामले में पीड़ित परिवारों ने 2021 में ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में अपील दायर की थी। अदालत ने अपील स्वीकार करते हुए कहा कि राज्य बिना वैधानिक अधिग्रहण के किसी नागरिक की निजी संपत्ति पर कब्जा नहीं कर सकता।
इस मामले में वादियों की ओर से केस लड़ने वाले वकील मनोज अरोड़ा ने अदालत को बताया कि रामगढ़ में उनके क्लाइंट की दो मरला जमीन पर 2003 में सरकारी प्राइमरी स्कूल का निर्माण किया गया था। न तो उस समय भूमि का अधिग्रहण किया गया और न ही कोई मुआवजा दिया गया। वादियों को इस बात का पता तब चला जब 2018 में कराई गई पैमाइश के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि उनकी जमीन स्कूल परिसर का हिस्सा बन चुकी है। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने पाया कि राजस्व रिकार्ड में संबंधित जमीन वादियों के नाम है और सरकार या नगर निगम यह साबित नहीं कर सके कि भूमि का विधिसम्मत अधिग्रहण या हस्तांतरण किया गया था।
















