Delay in Search for Girl in Gorakhpur: कोतवाल लाइन हाजिर, चौकी इंचार्ज निलंबित

गोरखपुर में 10 वर्षीय बालिका के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही के चलते कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह को एसएसपी डा. कौस्तुभ ने शुक्रव
गोरखपुर में 10 वर्षीय बालिका के अपहरण और हत्या के मामले में पुलिस की लापरवाही के चलते कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक छत्रपाल सिंह को एसएसपी डा. कौस्तुभ ने शुक्रवार शाम को लाइन हाजिर कर दिया। इसके साथ ही नगर निगम चौकी प्रभारी दीपशिखा को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि यदि पुलिस ने पहली रात ही सक्रियता दिखाई होती, तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। परिवार ने मंगलवार (28 जुलाई) की रात से ही बच्ची की तलाश शुरू की थी, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
परिजनों के अनुसार, बच्ची के लापता होने के बाद उन्होंने अस्पताल और उसके आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन की। इसी दौरान सीसीटीवी फुटेज में एक वर्दीधारी व्यक्ति बच्ची को बाइक पर ले जाते हुए दिखाई दिया। जब परिवार ने डायल-112 पर सूचना दी, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें कोतवाली थाना भेज दिया। आरोप है कि रात करीब 11 बजे जब पिता और मौसी थाने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रात अधिक होने और फुटेज स्पष्ट न होने का बहाना बनाकर सुबह आने को कहा। परिवार ने पूरी रात बेटी की तलाश में गुजारी, लेकिन पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
बुधवार सुबह जब पिता फिर से कोतवाली पहुंचे, तो उन्होंने दिनभर थाने के बाहर बैठकर अधिकारियों से बेटी को खोजने की गुहार लगाई। इसके बाद दोपहर में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। जब एसएसपी ने मामले का संज्ञान लिया, तब जाकर जांच में तेजी आई और पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। हालांकि, तब तक काफी समय बीत चुका था। अंततः 34 घंटे बाद बच्ची का शव बरामद हुआ, जिससे परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि यदि पुलिस ने शुरुआती शिकायत को गंभीरता से लिया होता, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी।
















