Political Tensions in Jharkhand: परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज में बढ़ी चिंता

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर से गरमाता हुआ नजर आ रहा है। आदिवासी समाज में इस बात का डर है कि परिसीमन के कारण उनके लिए आरक्षित सी
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड में परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर से गरमाता हुआ नजर आ रहा है। आदिवासी समाज में इस बात का डर है कि परिसीमन के कारण उनके लिए आरक्षित सीटों की संख्या में कमी आ सकती है। इस चिंता के चलते आदिवासी समुदाय के लोग धीरे-धीरे आंदोलित हो रहे हैं और इस विषय पर जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। आदिवासी नेताओं का मानना है कि यदि परिसीमन को रोका नहीं गया, तो झारखंड में आदिवासियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कांग्रेस और झामुमो से जुड़े नेता इस मुद्दे पर सक्रियता दिखा रहे हैं। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने आगामी 30 अगस्त को आदिवासी एकता महाजुटान का आह्वान किया है, जिसमें सभी दलों के आदिवासी नेताओं को आमंत्रित किया जाएगा। मोरहाबादी में आयोजित होने वाली इस रैली का उद्देश्य आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा करना है। हाल ही में आदिवासी छात्र संघ ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर चेतावनी दी है कि यदि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया गया, तो झारखंड की एसटी आरक्षित विधानसभा सीटों में लगभग आधा दर्जन और लोकसभा की एक सीट भी कम हो जाएगी। इससे आदिवासी समाज की राजनीतिक भागीदारी कमजोर होगी।
2008 में भी परिसीमन आयोग ने आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या को 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव रखा था, जिसका विरोध आदिवासी समूहों ने किया था। उस समय तत्कालीन मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव के नेतृत्व में व्यापक विरोध के बाद झारखंड के लिए जारी परिसीमन आदेशों को निरस्त कर दिया गया था। अब समय-सीमा समाप्त हो रही है और इस मुद्दे पर सरकार और विपक्षी दलों की सोच लगभग एक जैसी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मुद्दे पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन के साथ बैठक कर क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को मजबूत किया है। दक्षिण के राज्य पहले से ही इस फैसले का विरोध कर रहे हैं, उनका तर्क है कि जनसंख्या नियोजन के लिए किए गए प्रयासों के कारण आदिवासी समुदाय की जनसंख्या कम हुई है, इसलिए उन्हें राजनीतिक संरक्षण मिलना चाहिए।
















