Politics: गूंगी गुड़िया टिप्पणी पर महाराष्ट्र में सियासत तेज, सुनेत्रा पवार को लेकर कांग्रेस-एनसीपी आमने-सामने

महाराष्ट्र की उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के संदर्भ में कांग्रेस द्वारा की गई एक विवादास्पद टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने एक वीडि
महाराष्ट्र की उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के संदर्भ में कांग्रेस द्वारा की गई एक विवादास्पद टिप्पणी ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस ने एक वीडियो साझा करते हुए सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहा, जिससे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। राकांपा ने कांग्रेस पर महिलाओं का अपमान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस तरह की भाषा का प्रयोग किसी भी राजनीतिक दल को शोभा नहीं देता। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी इस टिप्पणी की निंदा की और कहा कि यह राज्य की पहली महिला उप-मुख्यमंत्री के प्रति अपमानजनक है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिससे राजनीतिक माहौल और भी गरम हो गया है।
राकांपा के प्रवक्ता उमेश पाटिल ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि लोकतंत्र में नीतियों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन महिलाओं का अपमान करना अस्वीकार्य है। उन्होंने कांग्रेस से यह सवाल किया कि क्या वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए इस्तेमाल किए गए 'गूंगी गुड़िया' जैसे शब्दों को सही मानती है। पाटिल ने कांग्रेस से इस शब्द को वापस लेने की मांग की और सार्वजनिक जीवन में गरिमा बनाए रखने की अपील की। राकांपा के नेता रोहित पवार ने भी इस मामले को उसके संदर्भ में देखने की बात कही और बताया कि एक पत्रकार ने सुनेत्रा पवार से सवाल पूछने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय नेता ने उसे ऐसा करने से रोक दिया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी को भी इसी तरह की टिप्पणियों का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अपने कार्यों से आलोचकों को जवाब दिया।
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र की राजनीति में बीड जिले की कानून-व्यवस्था और संतोष देशमुख हत्याकांड को लेकर पहले से ही आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। कांग्रेस ने सुनेत्रा पवार की चुप्पी को मुद्दा बनाया है, जबकि राकांपा और महायुति के नेताओं ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ा है। यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि महिला सम्मान, राजनीतिक भाषा और सार्वजनिक संवाद की मर्यादा पर भी नई बहस छेड़ चुका है। इस विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नई दिशा दी है, जहां राजनीतिक दलों के बीच शब्दों की गरिमा और महिलाओं के प्रति सम्मान की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
















