Who is the lawyer filing FIR against Ruchika Singh?: पीएम मोदी के खिलाफ की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

नोएडा से मिली जानकारी के अनुसार, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की वकी
नोएडा से मिली जानकारी के अनुसार, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की वकील स्मृति सिंह ने रूचिका सिंह के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। पुलिस ने महिला वकील की शिकायत पर कई धाराओं में केस दर्ज किया है। यह मामला उस समय सामने आया जब रूचिका सिंह ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। इस घटना ने न केवल राजनीतिक हलकों में बल्कि सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा पैदा कर दी है। लोग रूचिका सिंह की टिप्पणियों को लेकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता स्मृति सिंह ने गाजियाबाद के वसुंधरा में एक्सप्रेसवे थाने में बुधवार को FIR दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि 23 जुलाई को रूचिका सिंह ने सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। स्मृति सिंह ने कहा कि यह सब जानबूझकर किया गया है और इससे विद्वेष फैलाने की मंशा साफ दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि समाज में शांति बनी रहे। इस मामले में नोएडा पुलिस ने रूचिका सिंह के खिलाफ IPC की धाराएं 352, 353 (1) और 356 (1) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत आरोपी को दो से तीन साल की सजा और जुर्माना भी हो सकता है।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि रूचिका सिंह फरीदाबाद में एक ब्यूटी पार्लर की संचालिका हैं और नोएडा के सेक्टर 168 स्थित लोटस जिंग सोसायटी में रहती हैं। FIR दर्ज होने के बाद से वह अपने फ्लैट पर ताला लगाकर भूमिगत हो गई हैं। पुलिस ने बताया कि रूचिका का मूल पता फरीदाबाद के ऊंचा गांव का है, लेकिन उनके मोबाइल नंबर से इस पते की पुष्टि नहीं हो पाई है। नोएडा एसीपी तृतीय राकेश प्रताप सिंह ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी और आरोपी युवती के खिलाफ कई धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। इस घटना ने न केवल कानूनी पहलुओं को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समाज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उसके दुरुपयोग के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है।
















