Police brutality in Gorakhpur: गोरखपुर में मासूम की हत्या के बीच उजागर हुआ सिपाही के दरिंदगी का पुराना खौफ, नहीं लौटी पीड़िता

गोरखपुर में एक युवती के साथ हुई दरिंदगी की घटना ने पुलिस की छवि को धूमिल कर दिया है। यह मामला उस समय का है जब बंगाल के नदिया जिले के सौरभ विश्वास अपनी प्रेमिका
गोरखपुर में एक युवती के साथ हुई दरिंदगी की घटना ने पुलिस की छवि को धूमिल कर दिया है। यह मामला उस समय का है जब बंगाल के नदिया जिले के सौरभ विश्वास अपनी प्रेमिका के साथ नौकरी की तलाश में गोरखपुर जंक्शन पहुंचे थे। 3 फरवरी 2025 की रात, जब वे प्लेटफार्म नंबर नौ पर ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तभी पुलिस की वर्दी में तैनात सिपाही अभिषेक यादव ने उन पर मोबाइल चोरी का आरोप लगाकर उन्हें रोक लिया। पूछताछ के बहाने, सिपाही ने उन्हें बाइक से गोरखनाथ थाने की ओर ले जाने का दावा किया। थाने के गेट पर सौरभ को उतारकर, उसने युवती को महिला थाने छोड़ने का बहाना बनाया और रास्ते में स्पोर्ट्स कॉलेज के पास जाकर उसके गहने लूटने का प्रयास किया। विरोध करने पर सिपाही ने युवती के साथ मारपीट की और फरार हो गया। सौरभ की सूचना पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आधे घंटे के भीतर युवती को बरामद कर लिया। सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से सिपाही को गिरफ्तार किया गया। उसके पास से दो आधार कार्ड भी बरामद हुए, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ जानलेवा हमला, जालसाजी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया। इस मामले में पीड़िता का बयान बेहद महत्वपूर्ण था, लेकिन युवती ने बार-बार गोरखपुर आने से मना कर दिया। उसका कहना था कि जिस शहर में पुलिसकर्मी खुद अपराधी बन जाए, वहां वह दोबारा कदम नहीं रख सकती। इस घटना ने न केवल युवती के मन में खौफ पैदा किया, बल्कि पुलिस की छवि पर भी गहरा असर डाला। अधिकारियों ने कई बार उसे सुरक्षा का भरोसा दिया और कहा कि प्रशासन उसकी यात्रा और ठहरने का पूरा खर्च उठाएगा, लेकिन युवती ने हर बार आने से इन्कार किया। उसका डर इतना गहरा था कि वह गोरखपुर लौटने को तैयार नहीं हुई। इस घटना ने पुलिस महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जेल से छूटने के बाद उसी सिपाही को फिर से इसी जिले में तैनात कर दिया गया। यह सवाल आज भी बना हुआ है कि जब जनता का भरोसा टूट जाता है, तो उसे दोबारा कैसे कायम किया जा सकता है।


















