Innovative Farming in Sant Kabir Nagar: कम लागत में ज्यादा मुनाफे के लिए संतकबीरनगर के किसान ने अपना नया फॉर्मूला

संतकबीरनगर के प्रगतिशील किसान चंद्रजीत यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र-बगही के कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार की सलाह पर एक अनोखा प्रयोग किया है। उन्होंने पहली बार
संतकबीरनगर के प्रगतिशील किसान चंद्रजीत यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र-बगही के कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार की सलाह पर एक अनोखा प्रयोग किया है। उन्होंने पहली बार एक ही खेत में मक्का और अरहर की खेती करने का निर्णय लिया है। यह प्रयोग न केवल लागत को कम करने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि इससे मुनाफा भी बढ़ रहा है। चंद्रजीत यादव का यह प्रयोग जनपद के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग खेतों में मक्का और अरहर की खेती करने पर लागत अधिक आती है, जबकि एक साथ करने पर यह लागत घट जाती है। इस प्रकार की खेती से किसान को बेहतर मुनाफा मिल रहा है। चंद्रजीत यादव ने बताया कि मक्का की खेती में भूमि की तैयारी से लेकर कटाई तक की लागत करीब 21 से 33 हजार रुपये प्रति एकड़ आती है। वहीं, मशीन का प्रयोग करने पर यह लागत 20 से 28 हजार रुपये प्रति एकड़ तक पहुंच जाती है। दूसरी ओर, अरहर की खेती में लागत 15 से 27 हजार रुपये प्रति एकड़ होती है। लेकिन जब दोनों फसलों को एक साथ उगाया जाता है, तो प्रति एकड़ लागत लगभग 30 हजार रुपये होती है, जिससे किसान को 15 से 20 प्रतिशत तक की बचत होती है।
कृषि विज्ञान केंद्र-बगही के कृषि वैज्ञानिक डॉ. देवेश कुमार ने हाल ही में चंद्रजीत यादव के खेत का दौरा किया और उन्हें वैज्ञानिक एवं संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। उन्होंने खरपतवार नियंत्रण, जल प्रबंधन और कीट एवं रोगों से फसल की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी रखने की सलाह दी। डॉ. कुमार ने बताया कि मक्का और अरहर की खेती एक साथ करने से भूमि का बेहतर उपयोग होता है और फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलता है। इसके साथ ही, यह उत्पादन जोखिम को भी कम करता है। अरहर फसल वायुमंडल से नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में भी मदद करती है।


















