Health Advisory: बरसात में नंगे पैर चलने से बचें, लेप्टोस्पाइरोसिस का खतरा बढ़ता है

बरसात का मौसम स्वास्थ्य के लिए कई चुनौतियाँ लेकर आता है, विशेषकर जब बात लेप्टोस्पाइरोसिस की होती है। मेरठ में हाल ही में आयोजित हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में वरिष्ठ
बरसात का मौसम स्वास्थ्य के लिए कई चुनौतियाँ लेकर आता है, विशेषकर जब बात लेप्टोस्पाइरोसिस की होती है। मेरठ में हाल ही में आयोजित हेलो डॉक्टर कार्यक्रम में वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने चेतावनी दी है कि गंदे पानी के आसपास नंगे पैर चलने से यह बीमारी फैल सकती है। लेप्टोस्पाइरा बैक्टीरिया से होने वाला यह संक्रमण संक्रमित जानवरों के मूत्र से फैलता है, जो बरसात के मौसम में आमतौर पर गंदे पानी में पाया जाता है। जब लोग इस पानी में नंगे पैर चलते हैं, तो बैक्टीरिया त्वचा के छोटे कट या खरोंच के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर जाता है। यदि समय पर इसका उपचार नहीं किया गया, तो यह लिवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसके साथ ही, मच्छरों के प्रजनन से डेंगू और मलेरिया का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए, इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
डॉ. सिरोही ने सलाह दी कि लोगों को चाहिए कि वे बरसात के मौसम में नंगे पैर चलने से बचें और गंदे पानी के संपर्क में आने से बचें। उन्होंने यह भी बताया कि मौसमी फल और हरी सब्जियों का सेवन बढ़ाना चाहिए और नियमित रूप से टहलने की आदत डालनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि 50 वर्ष की उम्र के बाद दूध के बजाय दही का सेवन करना फायदेमंद होता है, क्योंकि दूध पचाने की क्षमता इस उम्र में कम हो जाती है। नमी के कारण त्वचा में फंगस के निशान बन सकते हैं, इसलिए डिटाल साबुन से नहाना और गीले कपड़े न पहनना आवश्यक है।



















