Health Department's Efforts: मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हर महीने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (ए
मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने हर महीने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) वाली गर्भवतियों की पहचान करना है। हालांकि, इसके बावजूद मातृ मौतों की संख्या में कमी लाने में पूरी तरह से सफलता नहीं मिल पाई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 61,218 गर्भवतियों की जांच की गई, जिसमें से 6,321 महिलाएं एचआरपी श्रेणी में चिह्नित की गईं। इस दौरान 21 महिलाओं की मृत्यु हो गई, जो कि स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय है। ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) के तहत एएनएम हर बुधवार और शनिवार को गर्भवतियों की प्राथमिक जांच करती हैं। यदि किसी गर्भवती को हाई रिस्क की आशंका होती है, तो उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा जाता है। इसके अलावा, प्रत्येक माह की एक, नौ, 16 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा गर्भवतियों की जांच की जाती है। एचआरपी चिह्नित होने के बाद गर्भवती की सुरक्षित प्रसव तक निगरानी और उपचार का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, देवकली ब्लॉक में सबसे अधिक 1,446 गर्भवतियां एचआरपी श्रेणी में चिह्नित की गईं। इसके बाद कासिमाबाद में 1,001, बिरनो में 979, मुहम्मदाबाद में 793 और मनिहारी में 742 गर्भवतियां मिलीं। इसके अलावा, सुभाखरपुर में 641, जमानिया में 637, जखनिया में 583, मिर्जापुर में 524, गोड़ऊर में 500, करंडा में 485 और मरदह में 432 गर्भवतियां एचआरपी श्रेणी में चिह्नित की गईं। जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रभुनाथ ने बताया कि सभी पंजीकृत गर्भवतियों की नियमित जांच कराई जाती है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एचआरपी गर्भवतियों को चिह्नित कर उनका उपचार और फॉलोअप किया जाता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि गर्भवतियों को समय पर चिकित्सा सहायता मिले, स्वास्थ्य विभाग ने कई कदम उठाए हैं। गर्भवतियों की सुरक्षा और उनके शिशुओं की सेहत को प्राथमिकता देते हुए, विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि सभी गर्भवतियों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं।



















