CAG Report: यूपी स्वास्थ्य विभाग में गैर प्रैक्टिसिंग भत्ते में बड़ी अनियमितता का खुलासा

लखनऊ से राज्य ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले सात वर्षों में 106 स्वास्थ्य कर्मचारियों को गैर प्रैक्टिसिंग भत्ता (एनपीए) दिया, जो कि मे
लखनऊ से राज्य ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले सात वर्षों में 106 स्वास्थ्य कर्मचारियों को गैर प्रैक्टिसिंग भत्ता (एनपीए) दिया, जो कि मेडिकल प्रैक्टिशनर नहीं थे। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 571 डॉक्टरों को नियमों के विपरीत एनपीए का भुगतान किया गया। यह स्थिति दर्शाती है कि उस समय विभाग में एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली का अभाव था। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) द्वारा प्रस्तुत इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि वर्ष 2018 से 2024 के बीच 571 डॉक्टरों का मासिक वेतन निर्धारित सीमा से अधिक था, जिससे सरकार को 16,93,364 रुपये का नुकसान हुआ। इसके अलावा, 1660 मामलों में एनपीए की दर 21 प्रतिशत रही, जबकि इसे 20 प्रतिशत होना चाहिए था। यह सभी तथ्य दर्शाते हैं कि विभाग में वित्तीय प्रबंधन की गंभीर कमी है।
प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को उनके मूल वेतन का 20 प्रतिशत एनपीए दिया जाता है, लेकिन यह शर्त है कि डॉक्टर का मूल वेतन और एनपीए मिलाकर मासिक राशि 2,37,500 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 571 डॉक्टरों का मासिक वेतन इस निर्धारित राशि से अधिक था। इसके अलावा, 106 ऐसे कर्मचारी भी हैं जो मेडिकल प्रैक्टिशनर नहीं थे, फिर भी उन्हें एनपीए का भुगतान किया गया। यह स्थिति न केवल वित्तीय अनियमितता को दर्शाती है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है।



















