Centre's Statement on Creamy Layer in SC-ST Reservation: सुप्रीम कोर्ट में क्रीमी लेयर पर केंद्र का बयान

केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि देश की आरक्षण व्यवस्था केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि यह जाति, जनजाति और सामाजिक पिछड़ेपन जैसे ऐ
केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि देश की आरक्षण व्यवस्था केवल आर्थिक स्थिति पर आधारित नहीं है, बल्कि यह जाति, जनजाति और सामाजिक पिछड़ेपन जैसे ऐतिहासिक और सामाजिक आधारों पर निर्धारित की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि आरक्षित वर्गों के भीतर आय के आधार पर प्राथमिकता या उप-कोटा जैसी कोई व्यवस्था लागू करनी है, तो इसके लिए पहले पूरे सिस्टम की व्यापक समीक्षा और गहन अध्ययन आवश्यक है। इस संदर्भ में आरक्षित वर्गों के लाभार्थियों से जुड़े सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों का विश्लेषण भी जरूरी माना गया है।
15 जून 2026 को दायर एक याचिका के जवाब में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में अपने हलफनामे में कहा कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू करने का निर्णय केवल संसद ही ले सकती है। केंद्र सरकार ने अदालत से उस याचिका को खारिज करने की मांग की, जिसमें केंद्र को आरक्षित वर्गों के भीतर आय के आधार पर उप-कोटा बनाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।
केंद्र ने यह भी कहा कि याचिका में मांगी गई राहतें नीतिगत फैसलों के दायरे में आती हैं। इसलिए अदालत को बिना ठोस आंकड़ों या किसी कानून के आधार के सरकार को आरक्षण या आय आधारित प्राथमिकता से संबंधित नीतियां बनाने का निर्देश नहीं देना चाहिए। सरकार ने यह तर्क दिया कि ऐसा करना शक्तियों के बंटवारे और अदालतों के पूर्व के फैसलों के खिलाफ होगा।
याचिकाकर्ताओं ने मांग की थी कि अदालत सरकार को निर्देश दे कि प्रत्येक आरक्षित वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर उम्मीदवारों को एक अलग उप-वर्ग माना जाए और चयन प्रक्रिया में उन्हें अधिक प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए स्टेट ऑफ पंजाब बनाम दविंदर सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि आरक्षण के लिए SC और ST के भीतर उप-वर्ग बनाए जा सकते हैं।
















