Court Acquits All 40 Accused in Dalit Murder Case: राजस्थान में दलित की हत्या मामले में सभी 40 आरोपी बरी

राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (sc/st) मामलों की विशेष अदालत ने बुधवार को 2015 में हुए डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपि
राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (SC/ST) मामलों की विशेष अदालत ने बुधवार को 2015 में हुए डांगावास हत्याकांड के सभी 40 आरोपियों को बरी कर दिया। इस मामले में छह लोगों की हत्या की गई थी, जिनमें से पांच दलित थे। आरोपियों पर आरोप था कि उन्होंने दलित परिवारों को जबरन 23 बीघा जमीन से हटाने के लिए हिंसक हमला किया था। हालांकि, अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा। अदालत ने यह भी कहा कि सीबीआई ने अपनी जांच सही तरीके से नहीं की थी। अभियोजन पक्ष ने 82 गवाह पेश किए, लेकिन इनमें से अधिकांश गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके। इस मामले में बचाव पक्ष के वकील महेंद्र चौधरी ने कहा कि सीबीआई ने गलत लोगों को आरोपी बनाया और असली कारणों को नजरअंदाज किया। उन्होंने बताया कि गांव के घीसा राम ने बिना सही म्यूटेशन के चिमन राम को जमीन बेच दी थी, जिससे यह विवाद उत्पन्न हुआ। इस मामले में बरी किए जाने के बाद पीड़ितों के परिवारों ने निराशा व्यक्त की और सवाल उठाया कि जब कोई दोषी नहीं पाया गया तो फिर उन छह लोगों की हत्या किसने की। अदालत के बाहर फैसले के समय बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे और जब बरी किए जाने का फैसला सुनाया गया तो भीड़ में खुशी की लहर दौड़ गई। यह मामला राज्य में दलितों के खिलाफ हिंसा के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन का कारण बना था और इसे सीबीआई को सौंपा गया था। कई सालों की देरी के बाद हाईकोर्ट के दखल के बाद आरोपियों ने सरेंडर करना शुरू किया। इस मामले ने राज्य में दलितों के खिलाफ हिंसा के मुद्दे को फिर से उजागर किया है। अदालत के फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि क्या न्याय प्रणाली वास्तव में कमजोर वर्गों की रक्षा कर सकती है।















