Election of Deputy Speaker in Bengal Assembly: बंगाल विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के चुनाव की तैयारी, अगस्त में स्थाई समितियों का होगा गठन

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लगभग ढाई महीने बाद, राज्य विधानसभा की विभिन्न विभागीय स्थाई समितियों के गठन की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्म
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के लगभग ढाई महीने बाद, राज्य विधानसभा की विभिन्न विभागीय स्थाई समितियों के गठन की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। भाजपा के सूत्रों के अनुसार, यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो अगस्त में डिप्टी स्पीकर का चुनाव कराने के साथ-साथ विभिन्न विभागों की स्टैंडिंग कमेटियों का गठन भी किया जाएगा। यह महत्वपूर्ण कदम राज्य में नई सरकार के गठन के बाद उठाया जा रहा है, जब से किसी भी विभाग की स्थाई समिति का गठन नहीं हुआ है। डिप्टी स्पीकर के नाम की घोषणा भी अभी तक नहीं की गई है, जिससे विधानसभा के कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं का कहना है कि स्थाई समितियों के अभाव में विभागों के कामकाज की निगरानी और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही है। मंत्रियों को छोड़कर लगभग सभी विधायकों को कम से कम एक स्थाई समिति का सदस्य बनाया जाता है, जिससे उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में मदद मिलती है। स्थाई समितियों का मुख्य कार्य संबंधित विभागों के कामकाज की समीक्षा करना, सुझाव देना और अपनी रिपोर्ट संबंधित मंत्री को सौंपना होता है, ताकि विभाग की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाया जा सके। इसके अलावा, स्थाई समिति की प्रत्येक बैठक में भाग लेने पर विधायकों को 15 हजार रुपये का मानदेय मिलता है, लेकिन समितियों का गठन न होने के कारण उन्हें यह राशि भी नहीं मिल रही है।
वहीं, राज्य सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं, क्योंकि पिछली सरकार कई समस्याएं छोड़ गई है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तेज गति से काम कर रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल में कोलकाता दौरे के दौरान उनकी कार्यशैली की सराहना की थी। मंत्री ने भरोसा जताया कि अगस्त के भीतर स्थाई समितियों का गठन कर दिया जाएगा और इनमें विपक्ष के सभी दलों के विधायकों को भी उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। इस बीच, विधानसभा की सबसे महत्वपूर्ण पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) के अध्यक्ष को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा जारी है। परंपरा के अनुसार, इस पद पर विपक्ष के किसी विधायक को नियुक्त किया जाता है। इस पद को लेकर विपक्षी तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट आमने-सामने हैं। माना जा रहा है कि राज्य सरकार ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले तृणमूल के बागी गुट के किसी वरिष्ठ विधायक को पीएसी अध्यक्ष का पद दे सकती है। इस प्रकार, बंगाल विधानसभा में डिप्टी स्पीकर के चुनाव और स्थाई समितियों के गठन की प्रक्रिया राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है, जिससे आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।
















