Farmers' Protest Continues: किसानों का अनशन, नायब तहसीलदार को लौटाया

बबेरू। बिजली, पानी और अन्ना गोवंश की समस्याओं से जूझ रहे किसानों का अनशन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर उन्हें समझान
बबेरू। बिजली, पानी और अन्ना गोवंश की समस्याओं से जूझ रहे किसानों का अनशन लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। शुक्रवार को नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन किसान अपनी समस्याओं के समाधान न होने तक अनशन के अपने निर्णय पर डटे रहे। किसानों ने नायब तहसीलदार को यह कहकर लौटा दिया कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे। बबेरू और अतर्रा तहसील के किसानों ने बृहस्पतिवार को बिसंडा पावर हाउस परिसर में अनशन शुरू किया था। इस अनशन का उद्देश्य उनकी समस्याओं को उजागर करना और प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग करना है। शुक्रवार को नायब तहसीलदार अतर्रा ने अनशन स्थल पर पहुंचकर किसानों को जल्द ही समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन किसान अपने निर्णय से पीछे नहीं हटे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक उनका अनशन जारी रहेगा। समाजसेवी पीसी पटेल ने इस मुद्दे पर कहा कि 132 केवीए ग्रिड स्टेशन कोर्रम से बिसंडा पावर हाउस तक कार्य में तेजी लाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार अधिकारियों से बातचीत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस हल नहीं निकला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर कार्य नहीं हुआ, तो किसानों की धान फसल बर्बाद हो जाएगी।
अनशन के दूसरे दिन कई किसान नेता और समाजसेवी भी अनशन स्थल पर पहुंचे। डॉ. छुट्टू, केशव प्रसाद, बृजकिशोर पटेल, मोहित, धीरेंद्र पटेल, छोटेलाल, रामबहोरी पटेल, गया प्रसाद, संतोष सिंह, अनिल पटेल, संतोष मिश्रा, राजधर शुक्ला, अरुण द्विवेदी सहित अन्य किसान नेता वहां मौजूद रहे। सभी ने एकजुटता के साथ अनशन का समर्थन किया और प्रशासन से अपनी मांगों को पूरा करने की अपील की। किसानों ने कहा कि उनकी समस्याओं का समाधान न होने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत समस्याएं नहीं हैं, बल्कि यह पूरे किसान समुदाय की समस्याएं हैं। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि वह उनकी समस्याओं को गंभीरता से ले और शीघ्र समाधान प्रदान करे। किसानों ने यह भी कहा कि वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक दबाव में नहीं आएंगे और अपनी मांगों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।
















