Flood Alert in Kasganj: कासगंज में गंगा मार रही उफान, 24 घंटे में और बढ़ेगा पानी; प्रशासन ने तटबंधों पर निगरानी बढ़ाई

कासगंज जिले में बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है। गंगा नदी के जलस्तर में पिछले दो दिनों से लगातार गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अब एक बार फिर उफान आने की आशंका ज
कासगंज जिले में बाढ़ का खतरा अभी भी बना हुआ है। गंगा नदी के जलस्तर में पिछले दो दिनों से लगातार गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अब एक बार फिर उफान आने की आशंका जताई जा रही है। सोमवार को नरौरा के फाटक खोल दिए गए हैं, जिससे जलस्तर में परिवर्तन की संभावना बढ़ गई है। पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक बारिश का दौर लौटने से स्थिति और गंभीर हो गई है। कछला पुल पर गंगा का जलस्तर रविवार की तुलना में तीन सेंटीमीटर कम हुआ है, लेकिन यह अभी भी खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। सिंचाई विभाग ने सोमवार सुबह नरौरा बैराज से 1,53,173 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की जानकारी दी है, जिसके चलते अगले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में फिर से वृद्धि होने की संभावना है।
सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा सोमवार सुबह आठ बजे जारी की गई रिपोर्ट में बताया गया है कि हरिद्वार बैराज से 93,702 क्यूसेक, बिजनौर बैराज से 1,12,651 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,53,173 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया है। नरौरा से छोड़ा गया पानी लगभग 24 घंटे में कासगंज जनपद की सीमा में पहुंचेगा, जिससे मंगलवार तक गंगा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी होने की संभावना है। विभाग लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
गंगा के जलस्तर में आई गिरावट के कारण नदी का पानी अब किनारों से हटने के बजाय आसपास के निचले इलाकों और गांवों की ओर फैल रहा है। कई गांवों के समीप खेतों और संपर्क मार्गों के किनारे पानी भर जाने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों को फसलों के नुकसान की आशंका सताने लगी है, जबकि आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी तटबंध सुरक्षित हैं और कहीं से भी कटान या रिसाव की सूचना नहीं है। बाढ़ चौकियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने गंगा किनारे बसे गांवों के लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और नदी के बढ़ते या घटते जलस्तर के दौरान अनावश्यक रूप से किनारे पर जाने से बचें। यदि जलस्तर में दोबारा वृद्धि होती है तो आवश्यकतानुसार राहत एवं बचाव संबंधी तैयारी तत्काल लागू की जाएंगी।
















