Green Initiative in Ghaziabad: बुजुर्गों की मेहनत से हरियाली का संचार

गाजियाबाद में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों और घटती हरियाली के बीच कुछ बुजुर्गों और पर्यावरण प्रेमियों ने एक अनूठी पहल की है, जो समाज को पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक
गाजियाबाद में बढ़ते कंक्रीट के जंगलों और घटती हरियाली के बीच कुछ बुजुर्गों और पर्यावरण प्रेमियों ने एक अनूठी पहल की है, जो समाज को पर्यावरण संरक्षण का वास्तविक अर्थ समझा रही है। पिछले दो दशकों से यह टोली बिना किसी सरकारी सहायता या प्रचार-प्रसार की अपेक्षा किए लगातार पौधारोपण और उनकी देखभाल में जुटी है। इनके प्रयासों से अब तक शहर के विभिन्न हिस्सों में 25 हजार से अधिक छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं। इनमें से हजारों पौधे अब विशाल वृक्ष बनकर लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर पर्यावरण दे रहे हैं। यह मुहिम राजनगर स्थित सेव अर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट के बैनर तले चल रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें जीवित रखना भी है। इसके लिए टोली के सदस्य प्रतिदिन सुबह छह बजे से साढ़े सात बजे तक ई-रिक्शा और छोटे वाहनों में पानी की टंकियां भरकर निकलते हैं। वे शहर की विभिन्न ग्रीन बेल्ट और सड़कों के किनारे लगाए गए पौधों की सिंचाई करते हैं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर नए पौधे भी रोपते हैं। इस अभियान की शुरुआत पर्यावरण प्रेमी अभय त्यागी ने अकेले की थी, लेकिन धीरे-धीरे उद्यमी, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस नेक कार्य में शामिल होते गए। आज उनके साथ डा. राकेश चावला, अजय मित्तल, अश्विनी शर्मा, शिव कुमार शर्मा और धर्मेंद्र जैसे कई सदस्य नियमित रूप से श्रमदान कर रहे हैं।
टीम के सदस्य बताते हैं कि पौधारोपण और देखभाल का अधिकांश खर्च वे अपनी पेंशन और निजी आय से उठाते हैं। उन्होंने कभी किसी से सहयोग की मांग नहीं की। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पौधे, पानी की व्यवस्था या अन्य सहयोग करता है, तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाता है। इस कारण अब राहगीर और स्थानीय निवासी भी इस अभियान से प्रेरित होकर पौधे दान करने लगे हैं। इस मुहिम के तहत नीम, पीपल, पिलखन, सहजन, आम, इमली, बेल और अन्य देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनका चयन इस आधार पर किया जाता है कि वे लंबे समय तक जीवित रहें और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में अधिक उपयोगी साबित हों। आज शहर की करीब 30 से 40 ग्रीन बेल्ट इन लोगों की मेहनत से हरी-भरी नजर आती हैं। यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में एकता और सहयोग की भावना को भी बढ़ावा देती है। बुजुर्गों की इस टोली ने साबित कर दिया है कि यदि इरादा मजबूत हो, तो किसी भी कार्य को सफल बनाया जा सकता है। उनके प्रयासों से गाजियाबाद की हरियाली में न केवल वृद्धि हुई है, बल्कि यह एक प्रेरणा भी बन गई है कि कैसे हम सब मिलकर अपने पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं।
















