Himachal High Court Ruling: भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देना गैर कानूनी

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के बाद असफल होने वाले उम्मीदवारों द्वारा उस प्रक्रिया और उस
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के बाद असफल होने वाले उम्मीदवारों द्वारा उस प्रक्रिया और उसके नियमों को चुनौती देना गैर कानूनी है। न्यायालय की खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि जो उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में पूरी जानकारी के साथ भाग लेते हैं, वे परिणाम में असफल होने के बाद उस प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकते। इस निर्णय के तहत, मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी ने एकल जज के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें ड्राइवर पद पर नियुक्ति की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने 2012 में हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में अस्थायी रूप से ड्राइवर के पद पर कार्य किया था, लेकिन उनकी सेवा 16 जुलाई 2013 को समाप्त हो गई। इसके बाद निगम ने नई विज्ञापन प्रक्रिया शुरू की, जिसमें याचिकाकर्ता ने भाग लिया, लेकिन वह अंतिम मेरिट सूची में स्थान नहीं बना सके।
याचिकाकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए तर्क दिया कि उन्हें समानता का अधिकार है, क्योंकि एक अन्य व्यक्ति को नियुक्ति दी गई थी। हालांकि, अदालत ने यह पाया कि चयन प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी उम्मीदवारों को समान अवसर दिए गए थे और याचिकाकर्ता दूसरे दौर की मेरिट सूची में स्थान बनाने में असफल रहे। इस प्रकार, उन्होंने समानता का दावा नहीं कर सकते। अदालत ने यह भी कहा कि उम्मीदवारों को अपनी सुविधानुसार लाभ लेने और विरोध करने की नीति नहीं अपनानी चाहिए। इस निर्णय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने के बाद असफल उम्मीदवारों को प्रक्रिया को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।
















