Jharkhand HC directive: टाटा स्टील और जियाडा बैठक कर सुलझाएं भूमि लागत व ब्याज का 18 साल पुराना विवाद

राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने टाटा स्टील और झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) के बीच भूमि लागत, ब्याज
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस एसके द्विवेदी की अदालत ने टाटा स्टील और झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (जियाडा) के बीच भूमि लागत, ब्याज, मेंटेनेंस लेवी और लीज डीड से जुड़े करीब 18 वर्ष पुराने विवाद के समाधान का रास्ता साफ कर दिया है। अदालत ने जियाडा को छह सप्ताह के भीतर मामले पर पुनः निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि यदि आवश्यक हो तो जियाडा और टाटा स्टील के अधिकारी सर्वसम्मति से विवाद का समाधान निकाल सकते हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने के प्रयास किए जाने चाहिए।
टाटा स्टील ने वर्ष 2008 में दायर रिट याचिका के माध्यम से तत्कालीन आयाडा (वर्तमान में जियाडा) के नौ जुलाई 2005 के आदेश को चुनौती दी थी। कंपनी का पक्ष था कि वर्ष 1990-91 से 2001-02 की अवधि के लिए 14,91,753 रुपये की मूल भूमि लागत पर ब्याज की मांग कानूनसम्मत नहीं है, क्योंकि मूल राशि की पहली मांग दो मई 2001 को की गई थी। ऐसे में उससे पूर्व की अवधि का ब्याज वसूलना अनुचित है। इसके अलावा याचिका में कंपनी ने 47,71,800 रुपये प्रतिवर्ष की मेंटेनेंस लेवी को भी चुनौती दी थी। कंपनी का तर्क था कि यह शुल्क राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना लगाया गया। जबकि ऐसा शुल्क केवल एकमुश्त लगाया जा सकता है, न कि प्रतिवर्ष। साथ ही टाटा स्टील ने 42.68 एकड़ भूमि से संबंधित लीज डीड हटाने की भी मांग की थी।
















