Kangra News: सेना लौटी, पंचायत संभालेगी राहत कार्य, पुनर्वास के लिए भूमि चिह्नित

धर्मशाला। बोह त्रासदी के नौ दिन बाद, बादल फटने से हुई तबाही के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटे सेना के जवान बुधवार को दोपहर को लौट गए हैं। अब राहत कार्यों की जि
धर्मशाला। बोह त्रासदी के नौ दिन बाद, बादल फटने से हुई तबाही के बाद राहत और बचाव कार्य में जुटे सेना के जवान बुधवार को दोपहर को लौट गए हैं। अब राहत कार्यों की जिम्मेदारी स्थानीय पंचायत को सौंप दी गई है। प्रशासन ने आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए स्पैड़ा गांव में 40 कनाल भूमि चिह्नित की है, जहां प्रत्येक परिवार को 6-6 मरले भूमि आवंटित की जाएगी। 21 जुलाई को बादल फटने के बाद मलबे में दबे गढ़गून गांव के रास्तों को बनाने और वहां भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए सेना के जवानों की मदद ली गई थी। लगभग छह दिनों तक सेना ने यहां राहत और बचाव अभियान चलाया। सेना के प्रयासों से गढ़गून और स्पैड़ा के कई परिवारों का सामान निकाल लिया गया है। अब आगे के राहत और अवशेष हटाने के कार्य की कमान पंचायत स्तर पर संभाल ली गई है, जिसके अगले दो से तीन दिनों में पूरा होने की उम्मीद है।
प्रशासन ने आपदा में सब कुछ गंवा चुके लोगों के पुनर्वास के लिए स्पैड़ा गांव में 40 कनाल भूमि चिह्नित की है। घर खो चुके प्रत्येक प्रभावित परिवार को नए मकान के निर्माण के लिए 6-6 मरले भूमि आवंटित की जाएगी। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त जमीन के एवज में 5,000 रुपये और फसल नुकसान के लिए 2,000 रुपये की आर्थिक मदद का प्रावधान किया गया है। मलबे में दबी गाय-भैंस के लिए 55,000 रुपये और भेड़-बकरी के नुकसान पर 15,000 रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। गांव में मशीनरी न पहुंचने के कारण सेना को बुलाना पड़ा। उपायुक्त हेम राज बैरवा ने बताया कि गढ़गून गांव में बादल फटने से अधिक नुकसान हुआ था और लोग के घर भी मलबे में दब गए थे। गांव के लिए सड़क न होने के कारण मशीनरी पहुंचाना बहुत मुश्किल था। सेना के जवानों ने सर्वे कर रास्ता बनाकर मशीनरी को गांव तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि राहत कार्य के दौरान एक मशीनरी खराब भी हो गई है, जिसे जल्द ही दुरुस्त कर कार्य शुरू किया जाएगा। प्रभावित लोगों के राशन कार्ड और गैस कनेक्शन फिर से दिए जा रहे हैं।
















