Kidnapping and Murder Case in Muzaffarnagar: 27 साल पुराने फिरौती अपहरण-हत्या मामले में एक दोषी करार

मुजफ्फरनगर में 27 साल पुराने फिरौती के लिए अपहरण और हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने एक आरोपी
मुजफ्फरनगर में 27 साल पुराने फिरौती के लिए अपहरण और हत्या के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय, फास्ट ट्रैक कोर्ट-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने एक आरोपी को दोषी ठहराया है। यह मामला 1999 में शुरू हुआ था जब मोहम्मद आबाद ने अपने चचेरे भाई हारुन और मुकर्रम के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि तीन बदमाशों ने ट्रैक्टर-ट्राली रोककर इन दोनों का अपहरण किया था। अपहरण के बाद, मुकर्रम को रुपये लाने के लिए छोड़ दिया गया था, जबकि हारुन को बंधक बना लिया गया था। बाद में, हारुन के पिता से फिरौती मांगने के लिए बदमाशों ने संपर्क किया और पांच लाख रुपये की मांग की। इस मामले में सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों को पेश किया, जिनमें चश्मदीद गवाह भी शामिल थे। न्यायालय ने 12 अगस्त को दोषी को सजा सुनाने का आदेश दिया है।
इस मामले की शुरुआत 9 दिसंबर 1999 को हुई थी जब मोहम्मद आबाद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि वह और उनके चचेरे भाई हरिद्वार जा रहे थे, तभी रास्ते में बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। अपहरण के बाद, मुकर्रम ने भागकर अपनी जान बचाई और बताया कि हारुन अभी भी बदमाशों के पास है। इसके बाद, हारुन के पिता सालिम को बदमाशों ने चिट्ठी भेजकर फिरौती की मांग की। सालिम ने ट्रैक्टर लेकर बदमाशों से मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें बंधक बना लिया गया। 25 जनवरी 2000 को सालिम की हत्या कर दी गई और उसका शव जंगल में फेंक दिया गया। इस मामले में छपार पुलिस ने शाहनवाज नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसके खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था।
















