Bengal government to gather information on voters not appealing in tribunal: मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों की पहचान करेगी बंगाल सरकार

राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उन लोगों की पहचान करने की योजना बनाई है, जिन्होंने अब तक ट्रिब
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान उन लोगों की पहचान करने की योजना बनाई है, जिन्होंने अब तक ट्रिब्यूनल में अपील नहीं की है। प्रशासनिक स्तर पर ऐसे मतदाताओं की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इन लोगों की पहचान और सत्यापन का कार्य पुलिस द्वारा किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटने वाले लोगों को ट्रिब्यूनल में अपील करने का अवसर दिया गया था। प्रशासन का मानना था कि अधिकांश लोग अपने नाम को बहाल कराने के लिए आवेदन करेंगे, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने ऐसा नहीं किया। अब यह जानने की कोशिश की जाएगी कि उन्होंने आवेदन क्यों नहीं किया और उनकी नागरिकता की स्थिति क्या है। फरवरी के अंत में प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में लगभग 60 लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में विभिन्न प्रकार की सूचनात्मक विसंगतियां पाई गई थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से लगभग 27 लाख लोगों ने ट्रिब्यूनल का रुख किया था। जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लिए गए थे। ऑफलाइन आवेदनों को ऑनलाइन प्रणाली में अपलोड करने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की थी। अब ऑनलाइन और ऑफलाइन आवेदनों के अंतर के आधार पर ऐसे लोगों की सूची तैयार कर पुलिस को सौंपी जा सकती है। आशंका जताई जा रही है कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही से आवेदन अपलोड नहीं हुआ हो या कोई वास्तविक नागरिक बीमारी, संसाधनों की कमी अथवा जानकारी के अभाव में ट्रिब्यूनल तक नहीं पहुंच पाया हो, तो उसके साथ अन्याय हो सकता है।
इस बीच, तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी की आंखों के इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगने वाली याचिका को कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने पहले उन्हें एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था, लेकिन अभिषेक की ओर से उनके वकील ने स्पष्ट कर दिया कि वह मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित नहीं होंगे। इसके बाद अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि संबंधित बीमारी का उपचार भारत में संभव है या नहीं। न्यायालय ने एसएसकेएम अस्पताल के नेत्र विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में एक मेडिकल बोर्ड गठित कर अभिषेक की जांच कराने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा कि यदि बोर्ड यह राय देता है कि इलाज भारत में संभव नहीं है, तभी विदेश जाने की आवश्यकता पर विचार किया जा सकता है। अभिषेक के वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किल अमेरिका में पहले से इलाज करा रहे हैं और वहीं उसी चिकित्सक की देखरेख में उपचार जारी रखना चाहते हैं।
















