Sawan 2026: आज सावन के पहले दिन महाकाल की भस्म आरती से अयोध्या-प्रयागराज तक गूंजे 'हर-हर महादेव' के जयकारे!

सावन 2026 का आगाज 30 जुलाई को हुआ, जब श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं का तांता मंदिरों की ओर बढ़ने लगा। रात के बारह बजे से ही भक्तजन महाकाल मंदिर पहु
सावन 2026 का आगाज 30 जुलाई को हुआ, जब श्रावण मास की शुरुआत के साथ ही श्रद्धालुओं का तांता मंदिरों की ओर बढ़ने लगा। रात के बारह बजे से ही भक्तजन महाकाल मंदिर पहुंचने लगे थे। सुबह तड़के तीन बजे गर्भगृह के पट खोले गए और श्रद्धालुओं ने भगवान को हरिओम जल चढ़ाया। इसके बाद भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से किया गया। इस विशेष अवसर पर भक्तों ने भगवान के दर्शन का लाभ उठाने के लिए मंदिर में भारी संख्या में एकत्रित हुए। कई भक्तों ने इस पवित्र दृश्य को सीधे देखा, जबकि अन्य ने मंदिर परिसर में लगी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से भगवान के दर्शन किए। पूजन और श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।
महानिर्वाणी अखाड़े के महंतों द्वारा भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद सुबह की पहली और प्रसिद्ध भस्म आरती का आयोजन किया गया। इस आरती के दौरान घंटे, घड़ियाल, झांझ-मंजीरे और शंख की ध्वनि के बीच सृष्टि के अधिपति की आराधना की गई। यह दृश्य देखने के लिए उपस्थित भक्तों ने खुद को सौभाग्यशाली माना। श्रावण का महीना उज्जैन के लिए एक बड़े त्योहार के समान होता है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। आम दिनों की तुलना में इस महीने में मंदिर में भक्तों की संख्या दो से ढाई गुना तक बढ़ जाती है, विशेषकर सोमवार को। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर प्रबंधन समिति ने चलित भस्म आरती की व्यवस्था भी की है, ताकि अधिक से अधिक लोग दर्शन का लाभ उठा सकें।
















