Seat Sharing Conflict in UP: NDA में आरएलडी की सीटों की मांग पर बीजेपी का रुख

के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी का दावा है कि पश्चिमी यूपी में उसका सामाजिक आधार मजबूत है, जिसका फायदा गठबंधन को चुनाव में मिल सकता है। हालांकि, आरएलडी अब
के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। पार्टी का दावा है कि पश्चिमी यूपी में उसका सामाजिक आधार मजबूत है, जिसका फायदा गठबंधन को चुनाव में मिल सकता है। हालांकि, आरएलडी अब सिर्फ पश्चिमी यूपी की सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी पूर्वांचल में भी अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है। इसी के चलते आरएलडी वाराणसी, मिर्जापुर, जौनपुर, बलिया समेत कई जिलों में संगठन विस्तार और संभावित उम्मीदवारों के लिए सीटों की मांग कर रही है। बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आरएलडी को 20 से 25 सीटों तक सीमित रखना चाहती है। बीजेपी का मानना है कि गठबंधन में उन्हीं सीटों पर आरएलडी को मौका दिया जाना चाहिए, जहां पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत है और जीत की संभावना अधिक है। बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाहर आरएलडी को ज्यादा सीटें देने के पक्ष में नहीं है। पार्टी को अपने अन्य सहयोगियों को भी सीटें देनी हैं, जिनमें निषाद पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) और अन्य सहयोगी दल शामिल हैं। 2027 के चुनाव से पहले एनडीए के अंदर सीट बंटवारे को लेकर यह शुरुआती खींचतान मानी जा रही है। आरएलडी अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने के लिए ज्यादा सीटों पर दावा कर रही है, जबकि बीजेपी गठबंधन के सभी सहयोगियों के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले महीनों में बीजेपी और आरएलडी के बीच सीटों को लेकर सहमति किस फॉर्मूले पर बनती है और यूपी की चुनावी राजनीति में यह गठबंधन किस नए समीकरण को जन्म देता है।
















