Supreme Court Seeks Response on Transgender Amendment Act: 'पहले से मिले अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता'

नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवा
नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यह मामले की अंतिम सुनवाई 17 अगस्त को होगी। इस दौरान, न्यायालय ने उन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के प्रति चिंता व्यक्त की है, जिन्होंने पहले के कानूनी ढांचे के तहत पहचान पत्र प्राप्त किए थे। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। जस्टिस बागची ने कहा कि पीठ विशेष रूप से उन ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के संरक्षण के लिए चिंतित है, जिन्हें पहले के कानून के तहत ट्रांसजेंडर पहचान पत्र जारी किए गए थे। यह स्थिति उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो पहले से ही पहचान पत्र प्राप्त कर चुके हैं और अब संशोधित कानून के प्रभाव में आ रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से वरिष्ठ वकील जयना कोठारी ने बताया कि जब याचिकाएं दायर की गई थीं, तब सरकार ने एक अधिसूचना जारी करके संशोधित कानून को 25 मई से लागू कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहचान पत्र जारी करने वाला नेशनल पोर्टल बंद है, जिससे इन व्यक्तियों को पहचान पत्र प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। इस संदर्भ में, वरिष्ठ वकील ने पीठ से अनुरोध किया कि पहले के कानून के तहत टीजी कार्ड प्राप्त करने वाले व्यक्तियों को उनके मौजूदा अधिकारों से वंचित नहीं किया जाए। इसके साथ ही, उन्होंने याचिकाओं पर फैसला होने तक ऐसे कार्ड की वैधता को लेकर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की।
















