Supreme Court raises concerns: फार्मेसी काउंसिल के कामकाज पर चिंता जताई

सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के कामकाज को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि आखिर क्यों हर साल ऐसे कॉलेजों को मंजू
सुप्रीम कोर्ट ने फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के कामकाज को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि आखिर क्यों हर साल ऐसे कॉलेजों को मंजूरी दी जा रही है, जिनके पास आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और उनके सहयोगियों ने मौजूदा रेगुलेटरी सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे छात्रों के लिए अनिश्चितता पैदा हो रही है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि केंद्र के प्रस्तावित सुधारों के बावजूद पुराना सिस्टम क्यों जारी है। इस मामले में पीसीआई की याचिका पर सुनवाई की जा रही थी, जिसमें जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि जब संस्थानों के पास सभी आवश्यक उपकरण और मशीनें मौजूद हैं, तो उन्हें हर साल मंजूरी देने का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी मशीनों और उपकरणों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है, फिर भी यह प्रक्रिया क्यों जारी है, यह समझ से परे है।
जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि बीफार्मा या एम फार्मा जैसे कोर्स के लिए एक साल का लाइसेंस होना चाहिए, न कि हर साल नए लाइसेंस की आवश्यकता होनी चाहिए। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है, जो कि उनके भविष्य के लिए ठीक नहीं है। केंद्र की ओर से सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इस बात को स्वीकार किया कि मौजूदा सिस्टम छात्रों के लिए अनिश्चितता का कारण बन रहा है। उन्होंने पीठ को बताया कि कॉलेज के दृष्टिकोण से, छात्रों की स्थिति बेहद अनिश्चित हो जाती है। यह अनिश्चितता किसी भी छात्र के लिए अच्छी बात नहीं है।
















