Central Government's Silence on PoJK: डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने PM मोदी से पूछा सवाल- 'अगर हमारा है तो आवाज भी उठाओ'

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र सरकार से गुलाम जम्मू-कश्मीर में रह रहे लोगों के मुद्दों को अंत
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को केंद्र सरकार से गुलाम जम्मू-कश्मीर में रह रहे लोगों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार गुलाम जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग मानती है, तो वहां के हालात पर चुप्पी नहीं साधनी चाहिए और वहां के लोगों की आवाज को दुनिया के सामने रखना चाहिए। श्रीनगर में एक कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री से भी इस संबंध में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, 'यदि गुलाम जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, तो वहां क्या हो रहा है, इस पर भारत सरकार को खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए। मैंने अब तक इस मुद्दे पर केंद्र की ओर से कोई प्रभावी आवाज नहीं सुनी है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग को भी वहां के घटनाक्रम का संज्ञान लेना चाहिए और वहां के लोगों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।' फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जब तक गुलाम जम्मू-कश्मीर के लोगों की समस्याओं और चिंताओं का समाधान नहीं होता, तब तक इस मुद्दे पर निरंतर और प्रभावी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के उस बयान पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी, जिसमें प्रदेश में 5,000 से अधिक अवैध होटलों के निर्माण का उल्लेख किया गया था। फारूक अब्दुल्ला ने निजी होटलों की बढ़ती संख्या का बचाव करते हुए कहा कि यह पर्यटन के बढ़ते दायरे और लोगों के आत्मनिर्भर बनने का सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा, 'हमें इसका स्वागत करना चाहिए कि लोगों ने होटल बनाए हैं। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक जम्मू-कश्मीर आते हैं। यदि होटल नहीं होंगे तो वे कहां ठहरेंगे? मैंने वह दौर भी देखा है, जब पर्यटकों को टैक्सियों, निजी वाहनों और यहां तक कि सड़कों पर रात गुजारनी पड़ती थी। आज लोग सरकारी नौकरियों पर निर्भर रहने के बजाय अपने प्रयासों से रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं, यह अच्छी बात है।' दिल्ली में छात्रों के खिलाफ कथित कार्रवाई से जुड़े सवाल पर एनसी अध्यक्ष ने कहा कि विभिन्न मामलों में नामजद लोगों के परिवारों को परेशान किए जाने के आरोप बेहद गंभीर हैं। उन्होंने कहा कि निर्दोष परिवारों को परेशान करना उचित नहीं है और सरकार को इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा, 'परिवारों को परेशान किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यह गंभीर विषय है और सरकार को इस पर संवेदनशीलता के साथ ध्यान देना चाहिए।











