IIT Professor's Unique Teaching Method: बिना नोट्स, बिना लैपटॉप... इस IIT प्रोफेसर के 'दिमाग' में ही छपी है पूरी की पूरी फिजिक्स!

आज के डिजिटल युग में, जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ऑनलाइन पढ़ाई में 3d एनिमेशन, चमचमाते स्मार्ट स्क्रीन और रंग-बिरंगी प्रेजेंटेशन का बोलबाला है, ऐस
आज के डिजिटल युग में, जब शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ऑनलाइन पढ़ाई में 3D एनिमेशन, चमचमाते स्मार्ट स्क्रीन और रंग-बिरंगी प्रेजेंटेशन का बोलबाला है, ऐसे में IIT मद्रास के प्रोफेसर वी. बालाकृष्णन की शिक्षण शैली एक अनोखी मिसाल पेश करती है। वे बिना किसी नोट्स, लैपटॉप या स्लाइड के, केवल अपने ज्ञान और चॉक के सहारे फिजिक्स जैसे जटिल विषय को पढ़ाते हैं। उनके लेक्चर में न केवल छात्रों की रुचि बनी रहती है, बल्कि वे विषय की गहराई में भी उतरते हैं। प्रोफेसर बालाकृष्णन का यह तरीका इस धारणा को चुनौती देता है कि बेहतरीन शिक्षा केवल महंगे उपकरणों और हाई-टेक प्लेटफॉर्म पर ही संभव है।
प्रोफेसर बालाकृष्णन का क्लासिकल फिजिक्स का लेक्चर सुनना किसी चमत्कार से कम नहीं है। वे कक्षा में प्रवेश करते हैं, हाथ में न तो कोई कागज़ होता है, न ही कोई नोट्स या लैपटॉप। वे सीधे हरे चॉकबोर्ड की ओर मुड़ते हैं और बोलना शुरू करते हैं। अगले 50-60 मिनट तक वे न तो रुकते हैं और न ही किसी पन्ने को पलटते हैं। उनका हर शब्द और हर कॉन्सेप्ट एक तार्किक क्रम में जुड़ता चला जाता है, जैसे कि पूरी फिजिक्स उनके दिमाग में ही छपी हुई हो। उनका यह अनूठा तरीका छात्रों को सीधे समीकरणों और फॉर्मूलों में उलझाने के बजाय, उन्हें सवाल पूछने और मूलभूत सिद्धांतों को समझने के लिए प्रेरित करता है।
प्रोफेसर बालाकृष्णन के इस फ्री कोर्स की तुलना पश्चिमी देशों के पेड कोर्सेज से की गई है। एक विदेशी भौतिक विज्ञानी, जिसने NPTEL पर यह कोर्स पूरा किया, ने कहा कि 'हजारों डॉलर देकर पश्चिमी यूनिवर्सिटीज से पढ़े गए पेड कोर्सेज की तुलना में प्रोफेसर बालाकृष्णन के इस फ्री कोर्स में कहीं ज्यादा वैचारिक गहराई है।' हालांकि, कम रिज़ॉल्यूशन में अपलोड होने और बिना किसी चमकदार थंबनेल या प्रमोशन के कारण, भारत के बाहर की दुनिया को इस अनमोल खजाने की जानकारी देर से मिली। प्रोफेसर बालाकृष्णन की शिक्षण शैली न केवल छात्रों को ज्ञान की गहराई में ले जाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि शिक्षा का असली मूल्य केवल तकनीकी उपकरणों में नहीं, बल्कि शिक्षक के ज्ञान और उसके संप्रेषण में निहित है।









