Leopard Threat During Kanwar Yatra: हापुड़ में कांवड़ यात्रा पर तेंदुए का साया, गढ़-सिंभावली समेत 6 संवेदनशील इलाकों में वन विभाग का कड़ा पहरा

हापुड़ में इस बार कांवड़ यात्रा केवल भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौती नहीं होगी, बल्कि तेंदुओं की बढ़ती सक्रियता ने प्रशासन के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है।
हापुड़ में इस बार कांवड़ यात्रा केवल भीड़ और ट्रैफिक प्रबंधन की चुनौती नहीं होगी, बल्कि तेंदुओं की बढ़ती सक्रियता ने प्रशासन के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। गढ़मुक्तेश्वर, सिंभावली और बहादुरगढ़ जैसे क्षेत्रों में तेंदुओं की गतिविधियों को देखते हुए वन विभाग और पुलिस ने मिलकर सुरक्षा योजना बनाई है। इस योजना के तहत छह संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां तेंदुओं की आवाजाही हाल के महीनों में देखी गई है। इन स्थानों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी, विशेष गश्त की जाएगी और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों को तैनात किया जाएगा, ताकि लाखों शिवभक्त सुरक्षित यात्रा कर सकें। वन विभाग के अनुसार, कांवड़ मार्ग से जुड़े इन प्वाइंट्स पर कैमरों और फील्ड स्टाफ की मदद से लगातार निगरानी की जाएगी। किसी भी आपात स्थिति में रेस्क्यू अभियान चलाने के लिए विशेष टीमें तैयार रहेंगी। इसके अलावा, पूरे मार्ग की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था को केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि कांवड़ सेवा शिविर संचालकों, स्वयंसेवी संगठनों और स्थानीय लोगों को भी वन्यजीवों से बचाव के उपायों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। शिविरों में श्रद्धालुओं को जागरूक किया जाएगा कि यदि तेंदुआ दिखाई दे तो घबराएं नहीं और तुरंत पुलिस या वन विभाग को सूचित करें।
वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार गश्त करेंगी। अधिकारियों ने कांवड़ियों से अपील की है कि वे अकेले यात्रा न करें और समूह में चलें। विशेष रूप से रात के समय संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरने से बचने की सलाह दी गई है। यदि आवश्यकता पड़ी तो संबंधित क्षेत्र को अस्थायी रूप से सुरक्षित कर श्रद्धालुओं को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जाएगा। वन विभाग के अनुसार, गढ़मुक्तेश्वर, सिंभावली और बहादुरगढ़ क्षेत्र तेंदुओं की गतिविधियों के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं। बृजघाट गंगा खादर, झड़ीना, अनूपशहर रोड से लगे जंगल, बहादुरगढ़ के गन्ने के खेत, सिंभावली का वन क्षेत्र और गढ़मुक्तेश्वर का खादर इलाका लगातार तेंदुओं की आवाजाही के कारण निगरानी में हैं। कांवड़ मार्ग इन क्षेत्रों के निकट से गुजरने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को सख्त किया जा रहा है।











