Medical Miracle: पीजीआई में बिना चीरा लगाए तीन वर्षीय मासूम के फेफड़े से निकाला पेंच

रोहतक से संवाद न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पीजीआई के चिकित्सकों ने एक तीन साल के बच्चे के फेफड़े से बिना किसी चीरे के लोहे का पेंच निकाला है। यह पेंच नार
रोहतक से संवाद न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पीजीआई के चिकित्सकों ने एक तीन साल के बच्चे के फेफड़े से बिना किसी चीरे के लोहे का पेंच निकाला है। यह पेंच नारनौल निवासी बच्चे के फेफड़े में फंसा हुआ था, जो कभी भी उसकी सांस की नली को ब्लॉक कर सकता था। इस पेंच के फंसने के कारणों की जानकारी अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। बच्चे की जांघ की हड्डी टूटने के बाद 23 जुलाई को एक रूटीन सीने के एक्सरे में दाहिने फेफड़े में पेंच की मौजूदगी का पता चला। इसके बाद सीटी स्कैन से पुष्टि हुई कि पेंच दाहिने ब्रोन्कस इंटरमीडियस में फंसा हुआ था, जो एक दुर्लभ और खतरनाक स्थिति थी। इस स्थिति को देखते हुए ईएनटी विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. रमन वडेरा और उनकी टीम ने रीजिड ब्रोन्कोस्कोपी तकनीक का उपयोग किया। इस तकनीक के माध्यम से गले के रास्ते एक पतली दूरबीन डालकर लगभग दो घंटे चले ऑपरेशन में पेंच को सफलतापूर्वक बाहर निकाला गया। डॉ. वडेरा ने बताया कि बच्चे को कोई जटिलता नहीं हुई है और वह तेजी से ठीक हो रहा है।
डॉ. रमन वडेरा ने इस घटना के बाद अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अक्सर छह माह से बड़े बच्चे हर चीज को मुंह में डालकर उसकी जांच करते हैं। ऐसे में पेंच, सिक्के, बैटरी और खिलौनों के छोटे पार्ट्स बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे इस प्रकार की लापरवाही से बचें और अपने बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। बच्चों की जिज्ञासा को समझते हुए, अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने घरों में ऐसे खतरनाक सामानों को दूर रखें ताकि बच्चों को किसी भी प्रकार का खतरा न हो। इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना कितना आवश्यक है।









