No Intention to Harass: अमित शाह से मिले ईसाई नेता, एफसीआरए विधेयक पर चर्चा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ईसाई संगठनों को आश्वस्त किया है कि प्रस्तावित एफसीआरए विधेयक, 2026 किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। शाह ने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ईसाई संगठनों को आश्वस्त किया है कि प्रस्तावित एफसीआरए विधेयक, 2026 किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। शाह ने कहा कि यह विधेयक पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में ईसाई नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल बृहस्पतिवार को अमित शाह से मिला। प्रतिनिधिमंडल के एक सदस्य ने बताया कि गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार का ईसाई समुदाय या किसी अन्य धर्म को परेशान करने का कोई इरादा नहीं है।
प्रतिनिधिमंडल ने शाह को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि यदि सरकार विधेयक को वापस नहीं लेना चाहती है, तो इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा जाना चाहिए। उन्होंने मौजूदा अधिनियम की धारा 15 को हटाने की भी मांग की।
ज्वाइंट एक्शन फोरम ऑन माइनॉरिटीज के प्रतिनिधियों में कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया, नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया और चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के सदस्य शामिल थे। नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया के महासचिव असिर एबेनेजर ने बताया कि गृह मंत्री ने एक घंटे तक उनकी बात सुनी और कहा कि यह विधेयक ईसाई धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि कानून का पालन न करने वालों के खिलाफ है।
दूसरे प्रतिनिधिमंडल में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि शाह ने बताया कि 12 अगस्त को संसद में विधेयक पर चर्चा हो सकती है। एफसीआरए विधेयक, 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों के हंगामे के कारण इसे पारित नहीं किया जा सका।
















