CAG Highlights Serious Irregularities in UP Tourism Projects: यूपी पर्यटन परियोजनाओं में CAG ने पकड़ीं गंभीर अनियमितताएं, विभाग ने बिना सर्वेक्षण के ही करवा दिया काम

उत्तर प्रदेश में पर्यटन विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस र
उत्तर प्रदेश में पर्यटन विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि पर्यटन निदेशालय ने कई परियोजनाओं की पहचान बिना किसी पूर्व सर्वेक्षण और अवसंरचना अंतराल का आकलन किए ही कर दी। यह जानकारी विधानमंडल के मानसून सत्र में बुधवार को पेश की गई। सीएजी की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने में वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। इसके अलावा, परियोजनाओं को समय पर पूरा न कर पाने, निजी ट्रस्ट की भूमि पर निर्माण कार्य करने और करोड़ों रुपये की परिसंपत्तियों के वर्षों तक उपयोग में न आने जैसी गंभीर कमियों का भी जिक्र किया गया है।
सीएजी के अनुसार, पर्यटन निदेशालय ने वर्ष 2014-15 से 2023-24 के बीच केंद्र सरकार की तीन योजनाओं के तहत 12 परियोजनाओं पर 392.40 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसी तरह, राज्य सरकार की चार योजनाओं के तहत वर्ष 2020-21 से 2022-23 के दौरान 970 परियोजनाओं पर 774.26 करोड़ रुपये व्यय किए गए। इन सभी परियोजनाओं का क्रियान्वयन विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 82 नमूना परियोजनाओं में 397.50 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों और सुविधाओं का प्रस्ताव बिना किसी पूर्व सर्वेक्षण के तैयार किया गया। सीएजी ने इसे योजना निर्माण की गंभीर खामी माना है।















