Certificate Verification in Bengal: बंगाल में जातीय प्रमाणपत्रों की बड़े पैमाने पर जांच, 135 निरस्त; 45 हजार से अधिक संदेह के घेरे में

कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस सरकार के तहत एससी, एसटी और ओबीसी जातीय प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच की जा रही है। राज्य सचिवालय नवान्न की समीक्षा में अब तक 1,22,117
कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस सरकार के तहत एससी, एसटी और ओबीसी जातीय प्रमाणपत्रों की व्यापक जांच की जा रही है। राज्य सचिवालय नवान्न की समीक्षा में अब तक 1,22,117 प्रमाणपत्रों का सत्यापन किया गया है। इस जांच के दौरान 76,750 प्रमाणपत्र सही पाए गए हैं, जबकि 45 हजार से अधिक प्रमाणपत्र संदेह के घेरे में हैं। अब तक 135 प्रमाणपत्रों को निरस्त किया जा चुका है। इस कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जातीय प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सत्यता बनी रहे। आरोप है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में जल्दी-जल्दी में बड़ी संख्या में जातीय प्रमाणपत्र जारी किए गए थे, जिसके चलते फर्जी प्रमाणपत्रों का निर्माण होने की आशंका बढ़ गई थी। इस संदर्भ में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में बांकुड़ा में आयोजित हूल दिवस कार्यक्रम के दौरान चेतावनी दी थी कि यदि कोई दस्तावेज फर्जी पाया गया तो प्रमाणपत्र जारी करने वाले और लाभार्थी दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस चेतावनी के बाद नवान्न ने सत्यापन अभियान को तेज कर दिया है।
जांच के दौरान सरकारी अधिकारी संबंधित क्षेत्रों में जाकर दस्तावेजों और दावों का सत्यापन कर रहे हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि सभी प्रमाणपत्र सही और वैध हैं, अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गहनता से जांच करें। इस प्रक्रिया में, जो प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए जाएंगे, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह कदम राज्य में जातीय प्रमाणपत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाने और फर्जी प्रमाणपत्रों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए उठाया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि इस तरह की जांच से समाज में समानता और न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा।
















