Collegium: कॉलेजियम में पारदर्शिता पर जस्टिस भुइयां के सवाल

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की प्रणाली, जो उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति करती है, पर वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा
सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम की प्रणाली, जो उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति करती है, पर वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस उज्जल भुइयां ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेजियम की सिफारिशों में जज के चयन के कारणों का उल्लेख न करना, वास्तव में उन जजों के साथ अन्याय है जो अपने कार्य में उत्कृष्टता दिखाते हैं। जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया पारदर्शिता की कमी को दर्शाती है। शनिवार को कानूनी थिंक टैंक विधि की रिपोर्ट के विमोचन के दौरान उन्होंने कहा कि पिछले तीन कॉलेजियम प्रस्तावों में सिफारिशों के पीछे के कारणों का खुलासा नहीं किया गया है। उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या कारणों का न बताना पारदर्शिता के सिद्धांत से पीछे हटने के समान नहीं है। जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि कुछ सिफारिशें एक ही पैटर्न पर आधारित लगती हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि नियुक्तियों और पदोन्नतियों के कारणों का खुलासा न करना अयोग्य उम्मीदवारों को न्यायपालिका में प्रवेश करने का अवसर प्रदान करता है।
जस्टिस भुइयां ने न्यायपालिका में जनता के विश्वास को बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह आवश्यक है कि कॉलेजियम की सिफारिशों पर खुली चर्चा हो। उन्होंने कहा कि बिना कारण बताए कॉलेजियम उन जजों के साथ अन्याय कर रही है जो वास्तव में अपने कार्य में उत्कृष्ट हैं। इससे न केवल न्यायपालिका की पारदर्शिता में कमी आती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित नहीं करता कि योग्य उम्मीदवारों को ही न्यायपालिका में स्थान मिले। जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि न्यायपालिका में असंवैधानिक सोच वाले लोगों को प्रवेश से रोकने के लिए यह आवश्यक है कि सिफारिशों पर खुली चर्चा की जाए।















